जबलपुर। हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व विदिशा की सांसद सुषमा स्वराज और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ राष्ट्रध्वज का अपमान करने के आरोप संबंधी याचिका निराधार पाकर खारिज कर दी।
जस्टिस एनके गुप्ता की सिंगल बेंच ने 9 अप्रैल को अंतिम स्तर की बहस पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर था, जिसका बुधवार को खुलासा किया गया। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि रिवीजन कोर्ट ने अपने विवेक का इस्तेमाल करके केस समाप्त किया था, जिसे दी गई चुनौती निरस्त किए जाने योग्य है।
शिकायतकर्ता नसरल्लागंज सीहोर निवासी कांग्रेस नेता द्वारका जाट का आरोप था कि विदिशा की भाजपा सांसद सुषमा स्वराज के नेता प्रतिपक्ष नियुक्त होने के बाद मार्च 2010 में नसरल्लागंज सीहोर में स्वागत सभा आयोजित की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के जिला अध्यक्ष रघुनाथ भाटी और तत्कालीन कलेक्टर संदीप यादव मौजूद थे। इस दौरान एक बच्ची उल्टा तिरंगा लिए चल रही थी। इस गलती को देखकर भी नजरअंदाज किया गया।
पहले वारंट, फिर राहत
इसी वजह से राष्ट्रध्वज के अपमान पर सुषमा-शिवराज सहित अन्य के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग के साथ मई 2010 में अधीनस्थ कोर्ट में कंपलेंट केस लगाया गया था। जिस पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी हो गए। जिसके खिलाफ रिवीजन दायर की गई। जिस पर सुनवाई के बाद पहले वारंट पर रोक लगाई गई इसके बाद कंपलेंट केस ही खारिज कर दिया गया। रिवीजन कोर्ट के इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। शिकायतकर्ता का मूल तर्क यही था कि रिवीजन कोर्ट को इस तरह कंपलेंट केस निरस्त करने का अधिकार नहीं है।
इरादतन अपमान नहीं किया
इस मामले में अंतिम स्तर की बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने तर्क रखा कि उपस्थित नेताओं ने इरादतन राष्ट्रध्वज का अपमान नहीं किया है। बच्ची गलती से उल्टा तिरंगा लिए हुए चल रही थी, जिसे आधार बनाकर राजनीतिक द्वेषवश की जा रही दंडात्मक कार्रवाई की मांग बेमानी है। रिवीजन कोर्ट ने इसी बिन्दु को ध्यान में रखकर केस समाप्त करने का तर्कसंगत आदेश सुनाया था।