भोपाल। नर्मदा समग्र ने वर्ष 2015 के फरवरी माह में होने वाले नदी महोत्सव के लिए प्रतीक चिन्ह (Logo Launch) का अनावरण किया। यह अनावरण आज नदी का घर में हुआ, जिसमें प्रतीक चिन्ह के महत्व को भी बताया।
ज्ञातव्य होगा कि नर्मदा समग्र हर दूसरे वर्ष में नदियों, जल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता के लिये नदी महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन करता है। इस महोत्सव में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के लोग भी शामिल होते हैं, जो हर स्तर पर नदियों, जल, एवं पर्यावरण के संरक्षण हेतू कार्य कर रहे हैं।
फरवरी में होने वाले नदी महोत्सव का विषय “नदी जलग्रहण क्षेत्र - रसायन व उससे उत्पन्न समस्याएँ“ है। यह प्रतीक चिन्ह इस विषय के संक्षिप्त और सारगर्भित रूप को दर्शा रहा है। चिन्ह में हरा गाढा रंग कृषि के स्वस्थ तरीकों को, तो हल्का रंग वर्तमान कृषि पर रसायन एवं प्रदूषण के प्रभाव को दिखा रहा है। वृक्ष जलग्रहण के वनों और घर उस जल ग्रहण क्षेत्र में निवास कर रहे कृषक और रहवासिरयों को दर्शा रहा है। घर पर बना कर्क ;बंदबमतद्ध, रोग, भीषण बिमारियों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को संबोधित कर रहा है, जो कि रासायनिक उत्पादों क¢ उपभोग से उत्पन्न हो रही हैं। प्रतीक चिन्ह में दिखाई दे रही नीली लहर स्वच्छ व स्वस्थ जल की तो वहीं काली लहर प्रदूषित जल का संक¢त कर रही है। मरती हुई मछली पारिस्थितिकी तंत्र क¢ विनाश को दर्शा रही है, वास्तव में यह प्रतीक चिन्ह नदी जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरण पर प्राकृतिक प्रदूषण से हो रहे प्रभाव का हुबहु वर्णन कर रहा है।
इस अवसर पर नर्मदा समग्र क¢ न्यासी, कार्यकर्ता एवं अन्य सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।