धार। मांडू की खाई के छह गांवों की समस्या पर अंतत: प्रशासन को ध्यान देना ही पड़ा। मीडिया की खबरों को लगातार नजर अंदाज करने के बाद जब हाईकोर्ट ने जवाब मांगा तो खुद कलेक्टर जयश्री कियावत गांव पहुंची। गांव तक पहुंचने में उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा और तब स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण किन हालातों में वहां जीवन बिता रहे हैं।
मध्यप्रदेश के लोकप्रिय हिन्दी अखबार दैनिक भास्कर ने 17 दिसंबर के अंक में ‘कपड़े की झोली में मरीज को ले जाते हैं अस्पताल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि खाई के गांवों में सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल आदि सुविधाओं से ग्रामीण किस तरह कटे हुए हैं। खबर के आधार पर कुसुमबाई ने इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। जस्टिस पीके जायसवाल और आलोक वर्मा की युगलपीठ न शासन के अधिकारियों से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। इसी के मद्देनजर तीन दिन से कवायद चल रही है। पहले विभागीय अधिकारी गांवों में पहुंचे थे। रविवार को कलेक्टर सभी अफसरों के साथ पहुंचीं।
मालीपुरा के एक भवन में बनेगा डिलेवरी वार्ड
मांडू कमानी दरवाजा से ही कलेक्टर व जिले के अधिकारी पैदल चलकर मालीपुरा गांव पहुंचे। ग्रामीणों से रूबरू हुए। पहले स्वास्थ विभाग को आड़े हाथों लिया। गांव में एक भवन खाली पड़ा है, उसमें 5 अप्रैल तक डिलेवरी वार्ड बनाने और वहां प्रसूति करवाने की व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए। दो एएनएम व दो सहायिका रखने के लिए कहा। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस व एक बोलेरो वाहन अटैच करने के निर्देश दिए। केंद्र पर आवश्यक दवाएं रखने के लिए भी कहा। सीएमएचओ व बीएमओ को समय-समय पर गांव की व्यवस्था देखने व समस्याओं को देखने के लिए कहा।
ग्रामीणों ने कहा बारिश में वाहन चढ़ खाई से ऊपर नहीं जा पाता। इसके कारण मरीजों की जान चली जाती है। मांडू स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर नहीं होने की समस्या बताई। कलेक्टर ने व्यवस्थाओं को सही रूप से संचालित करने का आश्वासन दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग की शिकायत पर संबंधित अफसरों को मौके पर ही फटकार लगाई। पशु चिकित्सा अधिकारी के बारे में लोगों ने शिकायत की। कलेक्टर ने व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कहा सप्ताह में एक दिन पूरे पांच गांव का दौरा कर समस्याओं का निराकरण करें।
बिजली कंपनी द्वारा पिछले नौ दिन से पांच गांवों की बिजली काटी हुई होने की शिकायत की। कलेक्टर ने ग्रामीणों से आधा पैसा जमा करने पर आज ही बिजली चालू करने की बात कही। ग्रामीणों ने सहमति जताई। आंगनवाड़ी भवन की दुर्दशा को लेकर नालछा सीडीपीओ व सुपरवाइजर की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने का नोटस देने के निर्देश दिए। तातापानी में सेक्टर आफीसर डॉ. ललित गिरधानी के क्षेत्र में नहीं रहने की शिकायत पर कलेक्टर भारूड़पुरा अस्पताल पहुंची जहां गिरधानी अनुपस्थित मिले। उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए गए।