भोपाल। मप्र के नेता, अधिकारी, न्यायाधीश और व्यापारियों के ब्लेक अलाइंस को उजागर करने वाले डीमेट घोटाले में एसटीएफ को चकमा देकर फरार हुई डॉ.ऋचा जौहरी अब सरकारी गवाह बनना चाहती है। उसके पिता डॉ.एमएस जौहरी इसी कांड में पहले से ही जेल में हैं। वो चाहती है कि उसे जमानत दे दी जाए, बदले में उसके पास जो भी जानकारियां हैं, वो सब बताने को तैयार है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने डीमेट फर्जीवाड़े की आरोपी डॉ.ऋचा जौहरी की अग्रिम जमानत अर्जी ग्वालियर बेंच में सुने जाने की व्यवस्था दे दी। इसके लिए 23 जून की तिथि निर्धारित की गई है। इस बीच डॉ.ऋचा जौहरी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न करने की अंतरिम राहत दी गई है। हालांकि इससे पूर्व 21 जून को डॉ.ऋचा जौहरी को एसटीएफ के समक्ष हाजिर होकर अपने बयान दर्ज कराने कहा गया है।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश अजय माणिकराव खानविलकर की अध्यक्षता वाली युगलपीठ में मामला सुनवाई के लिए लगा। इस दौरान आवेदिका डॉ.ऋचा जौहरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आवेदिका डॉ.ऋचा जौहरी ने 2012 मेडिकल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। लिहाजा, 3 साल बाद कार्रवाई अनुचित है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि आवेदिका को संदेह है कि उसे राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है।
इससे पूर्व उसके पिता डॉ.एमएस जौहरी को इसी मामले में मुख्य आरोपी डॉ.योगेश उपरीत के बयान के आधार पर गिरफ्तार किया जा चुका है। वे फिलहाल जेल में हैं। जहां तक डॉ.ऋचा जौहरी का सवाल है तो वह डीमेट फर्जीवाड़े की जांच एजेंसी एसटीएफ के साथ सहयोग करने तैयार है। ऐसे में उसे अग्रिम जमानत अर्जी पर निर्णय आने तक गिरफ्तार न किया जाए। हाईकोर्ट से इस अंतरिम राहत की अपेक्षा है।
11 से 1 बजे के बीच हाजिर हों
हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद आवेदिका डॉ.ऋचा जौहरी को निर्देश दिया कि वे 21 जून को पूर्वान्ह 11 से अपरान्ह 1 बजे के बीच एसटीएफ ऑफिस ग्वालियर में हाजिर होकर अपने बयान दर्ज कराएं। चूंकि डीमेट घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ.योगेश उपरीत की जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई हुई है, अत: डॉ.ऋचा जौहरी की अग्रिम जमानत अर्जी भी वहीं ट्रांसफर की जाती है। 23 जून को इस मामले पर सुनवाई होगी, इस बीच एसटीएफ डॉ.ऋचा जौहरी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न करे।