भोपाल। भारत में साधू संतों से तात्पर्य मोहमाया से मुक्त व्यक्ति माना जाता है परंतु मप्र के नरसिंहपुर जिले के गांव गाडरवाड़ा में जनमे आचार्य रजनीश इसके ठीक विपरीत थे। वो लक्झरी लाइफ जीते थे, उनके पास उस जमाने में 90 रॉल्स रॉयस कारों का बेड़ा था, जबकि लोग एक अदद फीएट कार खरीदने के लिए वर्षों प्लानिंग किया करते थे। इसके बावजूद वो संतुष्ट नहीं थे। वो 365 रॉल्स रॉयस कारों को अपने बेड़े में शामिल करना चाहते थे। वो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन दुनिया में उन्हें मानने वाले आज भी करोड़ों हैं। शुरू से अंत तक उनका जीवन विवादित रहा परंतु उतना ही लोकप्रिय भी। जिसने भी उन्हें समझने का प्रयास किया, उनका ही होकर रह गया। लोगों ने उन्हें बिना पढ़े काफी विरोध किया परंतु जब उन्हें गौर से पढ़ा तो सहमत हो गया।
लोग उन्हें ओशो के नाम पर जानते हैं। ओशो अपने बेबाक और स्पष्ट विचारों से विवादों में भी रहे हैं। वे खुद काे अमीरों का गुरु कहते थे। उनका कहना था कि वे जो बात करते हैं, उसे अमीर और बुद्धिमान व्यक्ति ही समझ सकता है। भिखारी उनके पास नहीं आ सकते। आेशों की जीवन शैली भी बेहद आलीशान थी।
एक साक्षात्कार में ओशो ने कहा था कि उनके पास 90 रॉल्स रॉयस कारें हैं। उन्होंने कहा था, 'मेरे शिष्य चाहते हैं कि मेरे पास 365 रॉल्स रॉयस कारें हों, ताकी रोज में नई कार में बैठ सकूं। हालांकि, मैं सिर्फ एक घंटे के लिए ही ड्राइव पर जाता हूं। मेरे लिए इन कारों का कोई मूल्य नहीं है, लेकिन मेरे भक्त चाहते हैं कि मैं इन कारों में बैठूं। उन्हें इससे सुख मिलता है और मैं उनका सुख नहीं छीन सकता।'
मुझे अमीरों की चिंता करने दीजिए
अोशो ने इसी साक्षात्कार में कहा था, 'मैं जाे कहता हूं, वह बुद्धिमान, अमीर, शिक्षित और संस्कार वाला व्यक्ति ही समझ सकता है। मेरे पास भिखारी नहीं आ सकते। वह मेरी बात सुन सकते हैं, लेकिन समझ नहीं सकते। मैं स्वाभाविक तौर पर अमीर लोगों को गुरू हूं। मेरी रॉल्स रॉयस पर होने वाले खर्च पर लोग सवाल उठाते हैं, लेकिन मैं इसकी चिंता नहीं करता। दुनिया के सभी धर्म गरीबों की चिंता कर रहे हैं, मुझे अमीरों की चिंता करने के लिए छोड़ दीजिए।'