जबलपुर। हाईकोर्ट ने एसटीएफ को पीएससी 2012 के पेपर लीक मामले की जांच चार माह में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने एसटीएफ को इस बात की जांच करने भी कहा कि इस मामले में ज्यादा छात्र शामिल हैं या नहीं।
एसटीएफ जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट पीएससी को सौंपे। जस्टिस एसके गंगेले की एकलपीठ ने पीएससी को कहा कि जांच रिपोर्ट आने के एक माह के बाद यह निर्णय लें कि साक्षात्कार आयोजित करना है या नहीं। इसके बाद साक्षात्कार की अंतिम तिथि तय करें।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिन छात्रों ने ईमानदारी से परीक्षा उत्तीर्ण की है, वे नियुक्ति पाने के पूर्ण अधिकारी हैं, क्योंकि इससे उनका भविष्य जुड़ा है। एसटीएफ ने रिपोर्ट पेश कर बताया कि अभी तक इस मामले में कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है और जांच जारी है। एसटीएफ ने भोपाल की सीजेएम कोर्ट में अब तक दो चालान पेश किए हैं और पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी की यह जिम्मेदारी है कि वह जल्द से जल्द जांच पूरी करे, ताकि चयनित छात्रों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जा सके।
हाईकोर्ट ने पीएससी को साक्षात्कार आयोजित करने के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा जोगिंदर पाल मामले में दिए दिशा-निर्देशों को अंगीकार करने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि यदि परीक्षा गड़बड़ी में अधिक मात्रा में छात्र शामिल नहीं हों तो शेष छात्रों का साक्षात्कार कराया जा सकता है।
वर्ष 2012 की पीएससी की परीक्षा के बाद कुल 1152 छात्र साक्षात्कार के लिए चयनित किए गए थे, लेकिन पेपर लीक प्रकरण उजागर होने के बाद पीएससी ने साक्षात्कार निरस्त कर दिया था।
इस परीक्षा से डिप्टी कलेक्टर सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर 400 भर्तियां होनी हैं। पीएससी में चयनित छात्र नवीन बावरिया, पीयूष तिवारी ने 2014 में याचिका दायर कर साक्षात्कार आयोजित कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर दे दलील दी गई कि साक्षात्कार नहीं होने से उनका भविष्य अधर में है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और राजेश चंद ने पैरवी की।