
शुक्रवार सुबह 10 से 1 बजे की पाली में आरजीपीवी द्वारा आयोजित बीई प्रथम सेमेस्टर का पेपर था। छात्रों को जो केमेस्ट्री का पेपर दिया गया था वो 80 प्रतिशत आउट ऑफ सिलेबस था। छात्रों की आपत्ति के बाद परीक्षा केंद्रों से इसकी शिकायत आरजीपीवी को की गई। छात्रों की आपत्ति सही मिलने के बाद विवि ने तत्काल ई-मेल के माध्यम से दूसरा पेपर भेजा। छात्रों ने दूसरा पेपर हल करना शुरू कर दिया। आधा पेपर हल करने के बाद पता चला कि केमेस्ट्री का यह पेपर बीई का नहीं बल्कि बीफार्मेसी का है।
इसकी सूचना विवि को दी गई। विवि ने गड़बड़ी की शिकायत सही होने के बाद पेपर निरस्त कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ घंटे तक छात्र परेशान होते रहे।
पुराने सिलेबस से बना दिया पेपर
परीक्षा नियंत्रक डॉ. मोहन सेन का कहना है पेपर सेटर द्वारा पुराने सिलेबस के अनुसार पेपर सेट करने से यह परेशानी आई है। जबकि च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम में नया सिलेबस लागू है। विवि के नियमों में चैकिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण पेपर को परीक्षा केंद्रों में भेजने से पहले चैक करने के लिए लिफाफा खोलना संभव नहीं है। इसीलिए पेपर बिना चैक किए ही सीधे परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाता है। जबकि दूसरे विश्वविद्यालयों में यह व्यवस्था है।