
20 फरवरी को करीब 100 लोगों ने सुबह साढ़े 8 बजे पुलिस चौकी पर हमला किया था। यूनुस ने बताया कि 'मैंने कंट्रोलरूम फोन करके स्थिति की जानकारी दे दी थी। मैंने रेनापुर पुलिस स्टेशन के इन्चार्ज से मदद मांगी थी, लेकिन हमले के करीब 2 घंटे बाद तक कोई नहीं आया और तब तक भीड़ मेरे साथ मारपीट कर चुकी थी। उन्होंने मेरी परेड भी कराई। अपमानित किया।
बता दें कि 19 फरवरी को शिवाजी जयंती के मौके पर लातूर के पनगांव में कुछ लोग भगवा झंडे के साथ जुलूस निकाल रहे थे। यह इलाका संवेदनशील माना जाता है। इसलिए पुलिस ने लोगों को जुलूस निकालने से रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी इससे भड़क गए। ये लोग उस वक्त तो घर चले गए लेकिन अगले दिन सुबह फिर इकट्ठे हुए। एक कॉन्स्टेबल वहां पहुंचा तो भीड़ ने उससे मारपीट की। हालात की जानकारी इलाके के सब-इन्सपेक्टर यूसुफ शेख को मिली। वे मौके पर पहुंचे तो भीड़ ने उनके साथ भी बदसलूकी की। यूसुफ के हाथ में भगवा झंडा थमा दिया गया और उन्हें भी जुलूस में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।