
मध्य प्रदेश के इंदौर से करीब 170 किलोमीटर दूर जोबट तहसील का आदिवासी इलाका आज अपने बीच की एक बेटी की सफलता का जश्न मना रहा है। कंदा गांव में बधाइयों का तांता लगा है। सरकारी महकमे का हर अधिकारी और स्थानीय नेता इस बेटी की सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं। सब उसके सम्मान में भव्य जश्न की तैयारी कर रहे हैं।
तीन बहनों एक भाई में सबसे बड़ी 24 वर्षीय शारदा गरीब पिता रायसिंह की बेटी है लेकिन उसने आंखों की अक्षमता को कभी अपने सपनों में बाधा नहीं बनने दिया। बीते सोमवार को शारदा ने जब अलीराजपुर के कलेक्टर शेखर वर्मा को मदद के पैसे वापस लौटाए तो शारदा की सक्सेस स्टोरी से दुनिया वाकिफ हो गई। दरअसल, ग्रेजुएशन की पढ़ाई जारी रखने के लिए शारदा को पैसों की जरूरत थी। उसने कलेक्टर साहब से मदद की गुहार की थी। कलेक्टर साहब नेक दिल इंसान निकले और उन्होंने शारदा को शासन की योजना के अंतर्गत 10,000 रुपए की आर्थिक मदद की थी।
शारदा की मेहनत रंग लाई और उसे बैंक ऑफ इंडिया में बतौर बैंक पीओ (प्रमाणीकरण अधिकारी) की नौकरी मिल गई। शारदा बीते सोमवार को कलेक्टर साहब से फिर मिली और उनके दिए 10,000 रुपए उन्हें लौटा दिए। ये देख सब भौचक थे। इस पर शारदा ने कहा कि उसने इसलिए पैसे लौटाए हैं कि कलेक्टर साहब उन पैसों से किसी और जरूरतमंद की मदद कर सकेंगे। उसे नौकरी मिल गई है तो अब कोई दिक्कत नहीं है।
विषम परिस्थितियों में जीवन की कठिनाइयां भी शारदा का आत्मविश्वास नहीं डिगा पाई। मौका पड़ने पर असने पूरे साहस और आत्मसम्मान का परिचय दिया। यही वजह है कि शारदा की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उसे लोगों से खूब सराहना मिल रही है। झोबाट आदिवासी इलाके के नेता राजेश भील के मुताबिक शारदा की कामयाबी का जश्न जोर-शोर से मनाया जाएगा।