
इससे पहले 26 अप्रैल को पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था और सुरक्षा मकरंद देउस्कर ने उज्जैन प्रशासन को आगाह किया था कि अगले 15 दिन में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने के साथ तेज आंधी की आशंका है। इससे पंडालों के गिरने और आग लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है लेकिन जिला प्रशासन व मेला प्राधिकरण ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। देउस्कर ने एक गोपनीय पत्र उज्जैन कलेक्टर कवींद्र कियावत से लेकर गृह सचिव तक को भेजा था। जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा था कि जिन पंडालों में फायर सुरक्षा की गाइड लाइन के मुताबिक इंतजाम नहीं किए गए हैं, वहां व्यवस्था को दुरुस्त कराएं। देउस्कर का यह पहला पत्र नहीं था। इससे पहले भी तीन पत्र उज्जैन कलेक्टर को लिखे थे, बावजूद इसके फायर आर्डर का पालन नहीं कराया गया।
मौसम विभाग की चेतावनी का हवाला
इसके बाद उन्होंने मौसम विभाग की चेतावनी का हवाला देते हुए कहा गया है कि 30 अप्रैल 2016 को 36 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। मेला क्षेत्र में साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई रूप से बनाए गए टेंट, पंडाल, टॉयलेट और घास-पूस की झोपड़ियों का तेज आंधी के कारण फटने व टूटने की पूरी संभावना है। इससे किसी भी हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
सरकार को पहले से पता था सिंहस्थ में हो सकता है हादसा
पीएचक्यू सूत्रों का कहना है कि सिंहस्थ मेले में बनाए गए पंडालों में सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए थे। इसकी मॉनिटरिंग करने के लिए कलेक्टर ने टीम बनाई है। जो पंडालों में जाकर यह जांच करेगी कि आग से बचने के लिए तय गाइड लाइन का पालन हो रहा है या नहीं? लेकिन इस टीम ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह है कि मेले प्रारंभ होने के बाद से अब तक तीन पंडालों में आग लग चुकी थी। अब तेज आंधी चलने से हादसा हो गया।