मप्र में 205 नौकरशाहों के लोकायुक्त मामले पेंडिंग क्यों हैं ?

भोपाल। सोशल मीडिया पर कदाचरण के आरोपी कलेक्टर पर तत्काल कार्रवाई करने वाली सरकार करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले नौकरशाहों के प्रति रहस्मयी नरमी दिखाती आ रही है। लोकायुक्त की तमाम फाइलें पेंडिंग चल रहीं हैं। 205 अफसरों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है लेकिन सरकार ना तो कार्रवाई कर रही है और ना ही अभियोजना की स्वीकृति दे रही है। 

लोकायुक्त पुलिस सूत्रों के अनुसार दो आईएएस अफसरों रमेश थेटे व विवेक सिंह और आईएफएस अफसर बीके सिंह के खिलाफ चालान की अनुमति राज्य सरकार के पास अटकी हुई है। थेटे के खिलाफ उज्जैन में अपर आयुक्त रहते हुए 25 प्रकरण दर्ज हुए थे। सितंबर 2014 से मई 2015 के बीच लोकायुक्त ने इन प्रकरणों में चालान की अनुमति मांगी। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के तहत सरकार को 90 दिन के भीतर चालान की अनुमति देना चाहिए। बताया जाता है कि सरकार ने हाल ही में थेटे का प्रकरण अनुमति के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय को भेज दिया है। हालांकि इसकी भी कोई सूचना लोकायुक्त संगठन को नहीं दी गई है। 

ग्वालियर नगर निगम आयुक्त रहे विवेक सिंह के खिलाफ 2009 में प्रकरण दर्ज हुआ। सितंबर 2014 में चालान की अनुमति मांगी गई, लेकिन वह भी लंबित है। उज्जैन में सीसीएफ रहे बीके सिंह के यहां फरवरी 2013 में लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा था। चालान की अनुमति अभी लंबित है। यही नहीं, लोकायुक्त पुलिस ने 22 ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची सौंपी है जिनके खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की गई थी। वे रिटायर हो गए लेकिन सरकार ने विभागीय जांच नहीं की। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार जुलाई 2013 से अब तक अलग-अलग विभागों के 205 अफसरों, कर्मचारियों आदि के खिलाफ चालान की अनुमति लंबित है। 
डीएन शर्मा के खिलाफ नहीं हुई कोई कार्रवाई 

कृषि संचालक रहे डीएन शर्मा के ठिकानों पर अगस्त में लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा था। शर्मा के खिलाफ पहले से ही चार विभागीय जांच लंबित हैं। लेकिन शासन ने अब तक शर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 

जबलपुर में पदस्थ रहे सीसीएफ अजीत कुमार श्रीवास्तव ने एक टिंबर कारोबारी अशोक रंगा से 55 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। उन्हें अभी सिर्फ पद से हटाया गया है। जांच अपर मुख्य सचिव बीपी सिंह कर रहे हैं। 

व्यापमं घोटाले में डीआईजी आरके शिवहरे भी आरोपी हैं। इस मामले में एसटीएफ ने उन्हें गिरफ्तार किया था। वे जमानत पर जेल से बाहर आए हैं। फिलहाल व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। 

1995 बैच के आईजी डॉ. मयंक जैन पर छापामार कार्रवाई के बाद उनकी 100 करोड़ रुपए संपत्ति होने का खुलासा लोकायुक्त ने किया। लेकिन अब तक उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी गई है। 

इसलिए बदले सीएम के तेवर 
मंत्रालय में सीनियर आईएएस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को फीडबैक दिया कि कल्याणकारी योजनाएं लोगों तक मैदानी अधिकारियों कलेक्टरों के कारण दिक्कत हो रही है। इसी के बाद हुए पहले दौरे में मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर अफसरों को निशाना बनाया है। 

20 से अधिक अफसरों पर मामले
आईपीएस में 7 अधिकारियों की विभागीय जांच और तीन पर अनुशासनहीनता के मामले हैं। दो अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आईएफएस में 14 मामले हैं। इसी तरह आईएएस अधिकारियों में भी 6 मामले विभागीय जांच के हैं, जिनमें दो सेवानिवृत्त हो गए हैं। साथ ही चार आईएएस अफसरों पर बड़ी कार्रवाई विचाराधीन है। 

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!