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दाे माह पहले ही केंद्र सरकार ने मप्र सरकार को पत्र लिखकर चने को स्टॉक लिमिट के दायरे में लाने का अनुरोध किया था। लेकिन अधिकारियों की मजबूत धारणा के चलते प्रदेश में यह स्टॉक लिमिट नहीं लगी। कारोबारियों का अनुमान है कि जल्द ही चना दाल 100 रुपए के अासपास पहुंच सकती है। तुअर, उड़द, मूंग और मसूर दाल के दामों में नियंत्रण होने के कारण इनके दाम काफी समय से एक सीमित दायरे में ही चल रहे हैं। लेकिन चना दाल डेढ़ माह से कम समय में 3500 रुपए क्विंटल तक तेज हो चुकी है।
चना वायदा पर भी लगी रोक
दालों की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने सेबी ने 16 जून को चना वायदा के नए कॉन्ट्रैक्ट पर रोक लगा दी थी। दालों की कैटेगिरी में केवल चने में ही फ्यूचर ट्रेडिंग होती थी। वायदा बाजार में चने की कीमतों में पिछले 3 महीने के दौरान 62 फीसदी से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया है। दालों में सबसे ज्यादा कीमत चना दाल की ही बढ़ी हैं।
केंद्र सरकार ने बढ़ाया उत्पादन का अनुमान
अपने तीसरे अनुमान में सरकार ने चने का उत्पादन बढ़ा दिया है। 2014-15 में देश में 73.3 लाख टन चने का उत्पादन हुआ था। जबकि 2015-16 के लिए तीसरे अग्रिम अनुमान ने सरकार ने चना उत्पादन का लक्ष्य 74.8 लाख टन तय किया है।
चने के न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी बढ़ाया
मार्केटिंग वर्ष 2016-17 के लिए चने पर 75 रुपए प्रति क्विंटल के बोनस का भी ऐलान किया है। सरकार ने चने का सपोर्ट प्राइस 250 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 3,425 रुपए कर दिया है।