भोपाल में होर्डिंग संचालकों से 'गुप्त समझौता' की होगी जांच

भोपाल। पिछली परिषद की आखिरी बैठक में शहर में लगे होर्डिंग की अनुमति दो साल बढ़ाने का प्रस्ताव 'गुपचुप' तरीके से पास करने की अब जांच होगी। इसकी रिपोर्ट अगली बैठक में रखी जाएगी। नगर निगम परिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में यह तय किया। इस मुद्दे पर हंगामे के बीच यूनिपोल लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी। 

पिछले दिनों कांग्रेस पार्षद अब्दुल शफीक ने होर्डिंग संचालकों के साथ गुप्त समझौता करने का मामला उठाया था। उनके समर्थन में भाजपा भी आ गई। पार्षद आसंदी को घेर कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करने लगे। इस पर अध्यक्ष ने निगम प्रशासन को मामले की जांच का जिम्मा सौंप दिया। 

गौर तलब है कि होर्डिंग संचालकों से विज्ञापन कर की बकाया राशि 157 करोड़ की वसूली नगर निगम एक बार फिर नहीं कर पाया है। न तो किसी संचालक की कुर्की हुई और न ही नीलामी। वसूली के लिए आखिरी मोहलत खत्म हो जाने के बाद भी निगम को अब तक यह पता चल पाया कि होर्डिंग्स संचालकों की संपत्ति शहर में कहां-कहां हैं? ऐसे में यह सवाल भी सामने आ रहे हैं कि खुद निगम के अफसर ही वसूली को दबाने में लगे हुए हैं।

इससे पहले नगर निगम ने 15 दिन में होर्डिंग्स संचालकों को बकाया रकम जमा करने की मोहलत दी थी। इसी के साथ अपने जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि वे अपने अपने क्षेत्र में इन होर्डिंग्स संचालकों की संपत्तियों की पूरी जानकारी जुटाएं। इसके बाद इनकी संपत्ति की कुर्की की जानी थी ताकि इस संपत्ति की नीलामी से विज्ञापन कर की राशि वसूली जाए। लेकिन अब तक किसी भी जोन से सर्वे रिपोर्ट नहीं आई। गौरतलब है कि एक साल पहले यह राशि 128 करोड़ थी, बाद में निगम ने जब दोबारा सर्वे किया तो यह बकाया राशि बढ़कर 157 करोड़ रुपए हो गई। फिर भी निगम वसूली नहीं कर पा रहा है।

क्या है मामला
वर्ष 2008-09 में नगर निगम ने कलेक्टर गाइड लाइन के तहत होर्डिंग्स के लिए रेट लिस्ट जारी की थी। इसके विरोध में संचालक हाईकोर्ट चले गए थे। यहां मार्च 2015 में निगम के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद नोटिस जारी कर विज्ञापन कर जमा करने को कहा गया। वहीं कुछ लोग दोबारा हाईकोर्ट चले गए यहां फिर से फैसला निगम के पक्ष में आया। कुछ लोग सुप्रीमकोर्ट चले गए। संचालकों को यहां भी राहत नहीं मिली। तब तक होर्डिंग संचालकों ने अपना व्यवसाय जारी रखा।

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कोर्ट से हारे तो कमिश्नर से लगाई गुहार
होर्डिंग्स संचालकों को जब कोर्ट से राहत नहीं मिली तो वे पहले तत्कालीन निगम कमिश्नर तेजस्वी एस नायक से मिले। फिर वर्तमान कमिश्नर छवि भारद्वाज से सुनवाई के लिए आग्रह किया। यहां उन्हें जवाब मिला कि नियमानुसार पहले 50 फीसदी राशि जमा करना होगा तभी सुनवाई हो सकती है। अब बकाया राशि जमा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। प्रेमशंकर शुक्ला, होर्डिंग प्रभारी नगर निगम का कहना है कि होर्डिंग्स संचालकों के जवाब का इंतजार है। कमिश्नर के साथ बैठक के बाद भी आगे की कार्रवाई तय होगी। सर्वे में समय लग रहा है। सूची मिलने के बाद ही होर्डिंग्स संचालकों की संपत्ति नीलामी कर वसूली की जाएगी।

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