इंजीनियरिंग: भोपाल में 50 हजार सीटें खाली रह जाएंगी

भोपाल। पिछले 3 साल से मप्र के इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्टूडेंट्स का इंट्रस्ट लगातार कम होता जा रहा है। कॉलेज सीटें सरेंडर कर रहे हैं, उसके बाद भी बची हुई सीटें भर नहीं पा रहीं हैं। इंजीनियरिंग की 87 हजार सीटों के लिए पहले चरण की काउंसलिंग के 15 दिन में सिर्फ 11 हजार छात्रों ने ही च्वॉइस फिलिंग की है। हालांकि काउंसलिंग 30 जुलाई तक चलेगी, लेकिन अब उम्मीद नहीं है कि बहुत ज्यादा भीड़ आने वाली है। तमाम प्रयासों के बावजूद 37 हजार से ज्यादा सीटें नहीं भर पाएंगी। फाइनली 50 हजार सीटें खाली रह जाएंगी। 

यही नहीं बीएड कॉलेजों में भी एडमिशन नहीं हो रहे। यह स्थिति उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग और कॉलेजों के लिए ठीक नहीं है। इंजीनियरिंग की 87 हजार सीटों के लिए एडमिशन प्रक्रिया 15 जून से शुरू हो चुकी है। पहले चरण की यह काउंसलिंग 11 जुलाई तक चलेगी। अभी तक महज 27 हजार छात्रों ने पंजीयन कराया है। वहीं 18 हजार छात्रों ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया है और कॉलेजों में एडमिशन के लिए सिर्फ 11 हजार छात्रों ने च्वाइस फिलिंग की है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी इंजीनियरिंग कॉलेजों में आखिर तक 48 हजार एडमिशन हो पाए थे। इससे 50 हजार से अधिक सीटें खाली रह गईं थीं। इस बार इंजीनियरिंग कॉलेजों ने एडमिशन की स्थिति सुधारने के लिए करीब 10 हजार सीटें सरेंडर कर दी थीं। इसके बाद भी एडमिशन की स्थिति नहीं सुधर रही है।

बीएड में सिर्फ 12 हजार एडमिशन
इधर, बीएड कॉलेजों में पहले चरण की एडमिशन प्रक्रिया भी खत्म हो गई है। इन कॉलेजों में खाली सीटों की संख्या करीब 60 हजार है लेकिन पहले चरण की स्थिति से साफ हो रहा है कि बीएड की 30 हजार से अधिक सीटें खाली रह सकती हैं।

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