
दरअसल इस घटना में निगरानी विभाग उस समय आया जब कुछ ट्रक मालिकों ने सूचना दी की झारखंड के जमशेदपुर से 4 ट्रक पंजाब लोहे के समान लेकर जा रहे थे और इस महीने की 4 तारीख़ को आरोपी जितेंद्र गुप्ता ने एक ओवरलोडेड ट्रक को पकड़ा और ट्रक को छोड़ने के बदले एक लाख 45 हज़ार की मांग की और बाद में मोलभाव के बाद 80 हज़ार में बात बनी लेकिन ट्रक मालिकों ने इस बीच निगरानी विभाग को सूचित कर दिया और 12 जुलाई को एसडीएम को ड्राइवर से पैसे लेते रंगें हाथों पकड़ा गया। बाद में गुप्ता के घर पर छापेमारी में कई ट्रक के काग़ज़ात भी मिले।
आईएएस एसोसिएशन को आपत्ति
वहीं, राज्य की आईएएस एसोसिएशन का कहना हैं कि ये कार्रवाई ग़लत है और ड्राइवर के बयान पर अधिकारी की गिरफ़्तारी अगर होने लगी तो आने वाले दिनों में देश के कई अधिकारी जेल जा सकते हैं। इस सम्बंध में राज्य आईएएस एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल निगरानी विभाग के आलाधिकारियों से भी मिला। कुछ लोगों का कहना है कि इस सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि गुप्ता की कार्रवाई से ट्रक और एंट्री माफ़िया में खलबली मची हो और उन्होंने ड्राइवर के माध्यम से गुप्ता की गिरफ़्तारी कर दी।