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उन्होंने शुक्रवार सुबह ट्विटर पर 'जीडीपी' के तीर से आरबीआई और सरकार दोनों पर एकसाथ वार किया। स्वामी ने सुबह-सुबह ट्विटर पर लिखा, 'अगर मैं इंडेक्स नंबर के सैमुअल्सन-स्वामी थ्योरी को भारतीय जीडीपी की गणना या आरबीआई इंटरेस्ट रेट पर लागू करूं तो मीडिया चिल्लाने लगेगी कि ये पार्टी विरोधी गतिविधी है।'
इसमें कोई दो राय नहीं है कि सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्वीट के जरिए जिस तरह देश की जीडीपी के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं, इससे मोदी सरकार का आहत होना तय है क्योंकि दो साल के कार्यकाल के बाद केंद्र सरकार अगर अपनी सफलताओं को गिनाने बैठती है तो पहला नंबर बेहतर जीडीपी को देती है।
बता दें कि पॉल सैमुअलसन एक प्रतिष्ठित अमेरिकी अर्थशास्त्री थे। स्वामी कई मौकों पर उन्हें अपना गुरु तक बता चुके हैं। अभी बीते महीने ही सरकार ने बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के आंकड़े जारी करते हुए दावा किया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ी है। बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 7.9 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की है। मोदी सरकार ने इस तरह भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया। राजनीतिक जानकार स्वामी के इस ट्वीट को सीधे पीएम पर हमले की संज्ञा दे रहे हैं, जबकि निशाने पर हमेशा की तरह वित्त मंत्रालय और इसके प्रमुख अरुण जेटली भी हैं।