
कोल्ड चेन पर आधारित राज्य स्तरीय सेमिनार में शुक्रवार को उद्यानिकी विभाग के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल और संचालक एमएस धाकड़ ने सरकार की इस नीति के बारे में बताया। प्रदेश के विभिन्ना जिलों से अधिकारी, उन्नातशील किसान और कारोबारी मौजूद थे। धाकड़ ने बताया कि कोल्ड चेन के जरिए हम प्रदेश के आलू, संतरा, टमाटर, पपीता, केला को देश के किसी भी कोने में भेज सकते हैं। इससे यहां के किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। नेशनल कोल्ड चेन डेवलपमेंट (एनसीसीडी) के सर्वे के मुताबिक, मध्यप्रदेश में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता केवल 9.47 लाख मीट्रिक टन है, जबकि होना 18.18 लाख मीट्रिक टन चाहिए।
इससे साफ जाहिर है कि कोल्ड स्टोरेज को लेकर लंबी गेप है। अतः सरकार ने तय किया है कि फूड प्रोसेसिंग की नई नीति में प्रदेश में अगले दो साल में 5 लाख मीट्रिक टन क्षमता की वृध्दि की जाएगी। दिल्ली से आए एनसीसीडी के चीफ एडवाइजर और सीईओ पवनेश कोहली ने देश में कोल्ड स्टोरेज के बजाए कोल्ड चेन की अधिक पैरवी की। उन्होंने कहा कि कोल्ड चेन के जरिए हम खेत से निकलने वाले उत्पाद को उसके अंतिम उपभोक्ता तक बेहतर क्वालिटी के साथ पहुंचा सकते हैं। मध्यप्रदेश कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष हंसमुख गांधी ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज से संबंधित फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी बनाने में सरकार ने उद्यमियों से भी चर्चा की है। ये नीति काफी हद तक इन्वेस्टर्स फें्रडली साबित होगी। सीआईआई के मालवा जोन के चेयरमैन राजेंद्र जोशी ने कहा कि सरकार कोल्ड चेन को बढ़ावा दे रही है जिससे प्रदेश की उद्यानिकी फसलों को बेहतर भाव मिलेंगे। सेमिनार में नारंग कोल्ड स्टोरेज के अभिमन्यु नारंग और भानु फार्म्स के रवींद्र जैन ने अपनी सक्सेस स्टोरी के बारे में बताया। प्रदेश में सर्वाधिक कोल्ड स्टोरेज इंदौर और इसके आसपास हैं। प्रदेश में 200 से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं जिसमें 72 अकेले इंदौर में हैं।
---------------------
कम लागत के कोल्ड रूम भी बनेंगे
आमतौर पर एक कोल्ड स्टोरेज की लागत 4-5 करोड़ रुपए होती है। इतनी बड़ी राशि लगाकर कोल्ड स्टोरेज बनाना सभी निवेशकों के लिए संभव नहीं। इसलिए शासन कोल्ड रूम की योजना लेकर भी आ रहा है। इनकी क्षमता 6 से 8 मीट्रिक टन होगी।
कोल्ड रूम पर शासन 25 हजार रुपए प्रति मीट्रिक टन का अनुदान देगा। इसके साथ ही 50 मीट्रिक टन क्षमता के प्याज भंडारगृह भी बनाएगा। इसके लिए 50 फीसदी या अधिकतम 1.75 लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में फल, सब्जी आदि के लिए कलेक्शन सेंटर भी बनाने की योजना है। इसके लिए भी 50 फीसदी अनुदान या अधिकतम 1 करोड़ की सहायता दी जाएगी। इन सेंटरों पर फल, सब्जी की छंटनी, ग्रेडिंग और सफाई होगी।