
जी हां, ये वही शिवराज सिंह चौहान हैं जो ओला पीड़ित किसानों से मिलने के लिए गीले, रपटीले खेतों में कूद जाया करते थे। प्रोटोकॉल को तोड़कर किसानों के बीच पहुंच जाया करते थे। उज्जैन में महाकुंभ के दौरान जब भारी बारिश हुई तो उखड़ गए तंबुओं को खुद 20 फीट ऊपर चढ़कर जोड़ रहे थे। बारिश में रेनकोट पहनकर लोगों को चाय पिला रहे थे।
जी हां, ये वही शिवराज सिंह चौहान हैं जो नर्मदा किनारे बसे गांव जैत में जन्मे हैं। जहां का बच्चा बच्चा बाढ़ में तैरकर नर्मदा पार कर लेता है। जहां शिवराज सिंह चौहान घंटों तैराकी किया करते थे। जहां शिवराज सिंह ने गले गले तक डूबकर एक प्रण भी लिया था। समझ नहीं आता कि वही शिवराज सिंह चौहान अब पानी से इतना डरने क्यों लगे। तीसरी बार जीतने के बाद शिवराज सिंह में काफी कुछ बदल गया है। उनमें अब वो बात नहीं रही। रहिए अपडेट bhopalsamachar.com के साथ