
लांजी के पूर्व विधायक का मनाना है कि पूरी दुनिया में लोग जानते हैं कि गौतम बुद्ध शांति के प्रतीक हैं। सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध से परेशान होकर बौद्ध धर्म अपनाया था। उनका हृदय परिवर्तित हुआ था। गांधी के किसी भी शांति आंदोलन से एक भी आंतकवादी ने हथियार नहीं डाला बल्कि चौराचौरी कांड हो गया।
शांति का नोबल पुरस्कार देने वाली समिति ने गांधी और जिन्ना को शांति का प्रतीक नहीं माना है। अगर माना होता तो उन्हें कब का नोबल पुरस्कार मिल गया होता। इन्हीं की वजह से दोनों देश का विभाजन हुआ। जिससे सैकड़ों की संख्या में हिन्दू मुस्लिमों की जान गई थी। इसलिये ये शांति के प्रतीक नहीं हो सकते। असल शांति के प्रतीक तो गौतमबुद्ध हैं। जिनकी विचारधारा से आज भी लोग परिवर्तित हो रहे हैं, और इसी बात को सामने लाने के लिये यह यात्रा निकाली जाएगी।