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एडवोकेट संजीव राठौर ने बताया कि मुखर्जीनगर ए-75, एचआईजी निवासी रेखा सिंह ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद पेश किया था। उनके पति नरेंद्रसिंह ने जून 2004 में हाउस लोन स्वीकृत कराया था। इसका भुगतान 180 किस्तों में होना था। 19 मार्च 2012 में नरेंद्रसिंह की मौत हो गई।
हाऊस लोन के तहत बीमा कराया गया था। बैंक ने 42525 प्रीमियम के जमा किए थे लेकिन मौत के बाद बैंक ने मौत की जानकारी एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को नहीं भेजी और लोन की बकाया किस्तों की मांग मृतक की पत्नी से की। फोरम ने इसके लिए बैंक को दोषी माना। साथ ही परिवादी को 2 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति और 1 हजार रुपए परिवाद के देने का अादेश दिया। राशि नहीं देने पर 9 फीसदी वार्षिक ब्याज अदा करने का आदेश दिया है।