
बैठक के दूसरे दिन शुक्रवार को टीम शिवराज से वन टू वन चर्चा में कामकाज का लेखा-जोखा मांगा गया। इस दौरान सांसद बोले कि कलेक्टर और कमिश्नर उनकी सुनते नहीं हैं। फोन करो तो कभी-कभी दो तीन दिन बाद जवाब मिलता है। प्रमुख सचिव फोन का जवाब तक नहीं देते। शिकायतें सुन संघ पदाधिकारी आश्चर्यचकित थे।
उन्होंने खुलकर ब्यूरोक्रेसी की शिकायतें करते हुए उपेक्षा के उदाहरण भी गिना दिए। एक सांसद ने कहा कि अफसर के सामने ऐसे खड़े होना पड़ता है कि जैसे याचक हों। अफसरों को इतना संरक्षण है कि वे मंत्री से ज्यादा पावरफुल हो गए हैं। कांग्रेस के कार्यकाल में भी ऐसी स्थिति नहीं देखी।
कुछ मंत्रियों ने ये भी कहा कि अफसर उन्हें तवज्जो ही नहीं देते। 12 घंटे तक चली बैठक में सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मंत्रिमंडल, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, पार्टी पदाधिकारी एवं सभी सांसद मौजूद थे।