
आजम खान ने कहा कि भगवान राम से मुसलमानों का कोई झगड़ा नहीं है, यदि वे (राम) होते तो इस देश में न कोई रथ निकलता और न किसी का खून बहाया जाता। डॉ. राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में आजम खान की ये बातें सुनकर वहां मौजूद लोग थोड़े समय के लिए हैरान रह गए क्योंकि आजम खान आए दिन भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद और खुद को रामभक्त कहने वाले लोगों पर हमले करते रहते हैं।
भगत सिंह के खिलाफ मुसलमान ने नहीं दी गवाही
कार्यक्रम में आजम खान ने भगवान राम की तारीफ की तो शहीद भगत सिंह की फांसी से जुड़े एक तथ्य पर सवाल उठा दिया। इतिहास के किताबों के मुताबिक जिन तीन लोगों की झूठी गवाही से भगत सिंह को फांसी की सजा दी गई थी, उनमें से एक मुसलमान था। आजम खान ने इस बात को झूठा करार दिया। उन्होंने कहा कि जिन तीन लोगों ने भगत सिंह के खिलाफ झूठी गवाही दी उसमें कोई भी मुसलमान नहीं था। अंग्रेज वायसराय ने बम फेंकने के आरोप में जब भगत सिंह को फांसी देने के लिए जज से कहा तो उसने इनकार कर दिया। वह जज सहारनपुर के बेग साहब थे। आजम खान ने कहा कि भगत सिंह ने धमकाने के लिए बम फेंका था, न कि किसी की जान लेने के लिए।