
कार्पोरेशन कहता है कि उच्च नमी के साथ गेहूं गोदामों में आता है। ऐसे में बारिश के बाद भी वह नमी ज्यादा नहीं बढ़ती तो कैसे एक किलो ज्यादा गेहूं दे दें। यह केंद्र सरकार का पुराना प्रावधान धान है। धान की भी यही हालत है कि 3 से 8 प्रतिशत तक नमी में कमी आती है लेकिन शासन सिर्फ 2 प्रतिशत ही मान्य कर रहा है। कार्पोरेशन के अधिकारियों व कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि रोकी गई राशि नहीं मिली और प्रावधान सरल नहीं किए गए तो काम बंद हड़ताल पर जाना पड़ेगा।
मप्र वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन फील्ड स्टॉफ एम्पलाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप बिसारिया और एमपी वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल वाजपेयी का कहना है कि कार्पोरेशन की एकमात्र आय भंडारण शुक्ल से होती है। कहीं भी एक प्रतिशत गेन नहीं मिल रहा। दूसरी ओर विभाग के सूत्र बता रहे हैं कि ग्वालियर संभाग लगातार एक प्रतिशत गेन दे रहा है। बहरहाल, कर्मचारी नेताओं का कहना है कि नान ने 2014-15 और 2015-16 के क्लेम का अभी तक निर्धारण नहीं किया। धान के क्लेम तो पिछले आठ सालों से लंबित हैं।