
मामले की जांच करने वाले जोधपुर इनकम टैक्स कमिश्नर ने पाया कि सिंघवी के अकाउंट्स से काफी कैश निकाला गया, जो करीब 7 करोड़ रुपए से लेकर 32 करोड़ रुपए तक था। सूत्रों के मुताबिक सिंघवी ने कहा है कि यह पैसा उनके लीगल असिस्टेंट्स को फीस देने के लिए निकाला गया था, इसमें से कुछ पैसा कैश में भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया।
वित्तीय वर्ष 2010-11 में आयकर विभाग को सिंघवी के दावों की सत्यता पर शक हुआ क्योंकि सिंघवी ने 16 करोड़ का खर्च दिखाया था, पर उससे जुड़ी कोई लिस्ट नहीं दी थी।
सिंघवी ने ये दी सफाई
आयकर विभाग की कार्रवाई पर सफाई देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार राजनीतिक लाभ पाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में चल रहा है, इसलिए मैं अभी इस पर कुछ कहना उचित नहीं है।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कोर्ट में सिंघवी दलील दे रहे हैं कि उनके इनकम टैक्स के पुराने महत्वपूर्ण कागजात दीमक खा गई है, जबकि देश के लिए कांग्रेस ही दीमक है।
ये है पूरा मामला
अभिषेक मनु सिंघवी का यह पूरा मामला 2010-11 से 2012-13 की आयकर देनदारी का है। आयकर विभाग को सिंघवी ने दलील दी थी कि उन्होंने अपने ऑफिस के कर्मचारियों के लिए तीन साल में 5 करोड़ रुपए के लैपटॉप खरीदे थे। यदि इसे मान लिया जाए तो तीन साल में सिंघवी ने अपने मात्र 14 कर्मचारियों के लिए 40 हजार रुपए के हिसाब से 1250 लैपटॉप खरीदे होंगे।
सिंघवी आयकर भुगतान में इन्हीं लैपटॉप की खरीद पर तीस फीसदी की छूट की भी मांग कर रहे थे। साथ ही सिंघवी ने आयकर विभाग को भेजे जवाब में यह भी दलील दी कि दिसंबर 2012 में उनकी आय से जुड़े कागजात को दीमक खा चुकी है। आयकर विभाग ने सिंघवी की यह दलील खारिज करते हुए 57 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।