
इस टकराव में पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव और विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया के बीच तनातनी ने स्थितियों को और बिगाड़कर रख दिया है। श्री यादव ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सरकारी सूत्रों से खबर मिली है कि राज्य की 15 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों में नये साल में रोजगार पूरी तरह से ठप्प हो गया है। 01 जनवरी 2017, के बाद से किसी भी तरह का रोजगार इन पंचायतों में नहीं खुला है। इसके चलते स्थिति हाहाकारी हो गई है।
श्री यादव ने कहा कि 31 दिसम्बर की रिपोर्ट के अनुसार इन 15195 ग्राम पंचायतों में श्रमिकों को रोजगार शून्य है:- जिसमें रीवा 512, सागर 507, सिवनी 483, सतना 475, धार 450, सीहोर 431, देवास 429, नरसिंहपुर 404, छतरपुर 386, होशंगाबाद 386, मंडला 374, कटनी 371, मुरैना 357, विदिशा 346, खंडवा 345, भिंड 343, रतलाम 334, बड़वानी 328, बैतूल 312, राजगढ़ 305, शिवपुरी 304, दमोह 297, जबलपुर 297, मंदसौर 296, पन्ना 284, रायसेन 271, गुना 268, अनूपपुर 262, टीकमगढ़ 261, झाबुआ 248, शहडोल 239, सीधी 230, शाजापुर 228, अलीराजपुर 218, नीमच 197, हरदा 186, सिंगरौली 184, उमरिया 183, ग्वालियर 180, श्योपुर 179, खरगोन 167, अशोकनगर 161, आगर मालवा 123, बुरहानपुर 117, इंदौर 111, डिंडोरी 85, दतिया 56, और भोपाल जिले की 6 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
श्री यादव ने कहा है कि स्थितियां और भी भयावह हों इसके पहले मुख्यमंत्री हस्तक्षेप कर पंचायतों के सरपंच और सचिवों की जायज मांगों को हल करने की पहल करें। श्री यादव ने कहा कि गोपाल भार्गव से विभाग संभल नहीं पा रहा है, इन हालातों में मुख्यमंत्री को बिना देर किये उनसे विभाग वापस लेकर किसी सक्षम मंत्री के हाथों में इस विभाग को सौंपने की पहल भी करना चाहिए।