
चंबल कमिश्नर शिवानंद दुबे, इंदौर कमिश्नर संजय दुबे, रीवा कमिश्नर एसके पाल भी तीन साल के कार्यकाल के दायरे में आ रहे हैं। भोपाल कलेक्टर निशांत बरबड़े चार साल से यहीं जमे हैं। इनकी पोस्टिंग इंदौर कलेक्टर या सीएम हाउस के लिए तय मानी जा रही है। रीवा कलेक्टर राहुल जैन, सीहोर कलेक्टर सुदाम खाड़े, देवास कलेक्टर आशुतोष अवस्थी, रतलाम कलेक्टर बी. चंद्रशेखर भी ढाई से तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके है। इंदौर कलेक्टर पी. नरहरि सचिव स्तर के अफसर बन चुके हैं।
तीन साल वालों पर भी नजर
राजस्व मंडल से हटा कर ओएसडी बनाए गए एमके सिंह और पंचायत राज संचालनालय से हटे संतोष मिश्रा की भी पोस्टिंग की जाना है। शिवपुरी कलेक्टर से विवाद के चलते सीईओ पद से हटाई गई नेहा मारव्या की भी पोस्टिंग की जाना है। इन सभी को मंत्रालय में विभाग और काम पाने का इंतजार है। प्रमुख सचिव उद्योग मोहम्मद सुलेमान, कृषि राजेश राजौरा, सहकारिता अजीत केसरी, लोक निर्माण प्रमोद अग्रवाल तीन साल से एक ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में एसीएस रजनीश वैश भी पांच साल से अधिक समय से वहां पदस्थ हैं। प्रमुख राजस्व आयुक्त के पद से हटाकर केके खरे को मानव अधिकार आयोग भेजे जाने के बाद दो माह बीत चुके हैं। यह पद खाली है। सीएलआर एमके अग्रवाल को पीआरसी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग में अभी कोई प्रमुख सचिव नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग की सचिव सूरज डामोर, वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर राजेश बहुगुणा तीन साल पूरे कर चुके हैं। इनके अलावा बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाणपत्र को निरस्त करने के कारण चर्चा में आए अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अशोक शाह और आदिम जाति कल्याण विभाग की आयुक्त दीपाली रस्तोगी के विभागों को भी बदला जा सकता है। शाह एक ही विभाग में कई सालों से पदस्थ हैं।
प्रमोटी की लंबी कतार, RR को भी पोस्टिंग का इंतजार
एक साल पहले राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा में आए अफसरों में दो-तीन अधिकारियों को ही राज्य सरकार ने अभी कलेक्टरी सौंपी है। बाकी बचे अफसरों को अभी कलेक्टरी का इंतजार है। ये जिलों में अपर कलेक्टर, सीईओ या मंत्रालय और डायरेक्ट्रेट में उपसचिव व संचालक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इधर वर्ष 2009 बैच तथा इसके बाद के बैच के आरआर आईएएस भी कलेक्टरी की आस लगाए हैं। हालांकि अगला साल चुनावी वर्ष होने के कारण नई फील्ड पोस्टिंग में प्रमोटी को ज्यादा मौका दिए जाने के चांस हैं।