
अभय दरे का रिश्वत संबंधी आडियो वायरल होने के बाद भाजपा संगठन ने उन्हें नोटिस देकर पूरे मामले पर अपनी सफाई पेश करने को कहा था। जवाब में उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अफसरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पत्र के माध्यम से 20 मार्च को संचालनालय आकर पक्ष रखने को कहा था, लेकिन 2 मार्च को 4 बजे उन्हें फोन करके तत्काल सागर से भोपाल आने को कहा और भोपाल में रात 7.45 से 8.45 बजे तक उनके बयान लिए गए। जबकि उन्हें जरूरी चर्चा का कहकर बुलाया गया था। इतना मौका नहीं दिया गया कि वकील से सलाह ले पाते। वहीं कल दरे ने सागर प्रवास पर पहुंचे राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल से मिलकर उन्हें अपने मामले की सफाई पेश की है।
फोरेन्सिक लैब से कराना चाहिए जांच
अपने जवाबी पत्र में दरे ने कहा है कि उन पर अमानत में खयानत का आरोप लगाया गया है, जबकि स्थिति यह है कि ठेकेदार ने दस लाख का बिल सबमिट किया था और मैंने उसे काटकर सात लाख का कर दिया था। इससे वह कुपित था। दरे ने कहा है कि जिस आडियो क्लिपिंग की वजह से मुझे आरोपों के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, उसकी जांच सरकार के अफसरों ने महज 12 घंटों में कैसे पूरी कर ली, जबकि इसकी जांच हैदराबाद की फोरेन्सिक लैब से कराई जाानी चाहिए थी। उन्होंने इसे सुनियोजित साजिश बताया है।
अगली सुनवाई 25 मई को
उधर अभय दरे मामले की सुनवाई अब मंत्रालय में 25 मई को होना है। नगरीय विकास विभाग ने उन्हें 25 मई को अपने पक्ष में प्रमाण लाने को कहा है।
क्या है मामला
नाला साफ करवाने को लेकर निगम ने जेसीबी किराए पर लिया था। जिसके बिल का भुगतान करने के लिए 25 फीसदी कमीशन की डिमांड की गयी थी। इसका काम ठेकेदार संतोष प्रजापति देख रहे थे। संतोष प्रजपति ने इस काम को लेकर 7 लाख पचास हजार के बिल को 25 प्रतिशत महापौर के कमीशन को जोड़कर 10 लाख कर दिया और बिल बनाकर पेश कर दिया। इसी बिल के भुगतान में महापौर और संतोष प्रजापति का यह ऑडियो वायरल हुआ है।