
उन्होंने कहा कि जीएसटी के बारे में एक महीने पहले ही उन्होंने प्रधानमंत्री को 16 पन्नों की चिट्ठी लिखी थी। इसमें अर्थव्यवस्था और सकल घरेलू उत्पाद दर में गिरावट के छह खतरनाक संकेतों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि अभी भी उनका यही मानना है कि मौजूदा आर्थिक स्थितियों तथा पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा के उन सुझावों को ध्यान में रखते हुए, जिसमें उन्होंने कहा है कि जीएसटी को तुरंत स्वीकार करना मुश्किल होगा क्योंकि इसे लेकर उद्योगों की तैयारी पूरी नहीं हो पाई है और जरुरी नेटवर्क का सेवा प्रदाताओं की ओर से पूरा परीक्षण भी नहीं किया गया है, जीएसटी को जुलाई 2019 तक के लिए टाल दिया जाना चाहिए।
वरना यह सरकार के लिए वाटरलू साबित हो जाएगा। जीएसटी के बारे में स्वामी की यह टिप्पणी जीडीपी के ताजे आंकड़ों के आलोक में आई है। इन आंकड़ों से ऐसा संकेत गया है कि नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था धीमी पड़ी है। परसों जारी किए गए जीडीपी आकंडों के अनुसार मार्च 2017 में समाप्त चौथी तिमाही के दौरान (जीडीपी) दर घटकर 6.1 फीसदी रह गई जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह सात फीसदी थी।