
70वें स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर ओम प्रकाश धुर्वे पहुंचे जरूर लेकिन दो मिनट की देरी से। प्रोटोकॉल का समय 9 बजे निर्धारित था। लेकिन प्रभारी मंत्री महोदय 2 मिनट देर से आये। उन्होंने आते ही ध्वजारोहण किया और बाद में परेड का निरीक्षण किया।
अब यह तलाशा जा रहा है कि मंत्री का यह कदम किस अपराध के अंतर्गत आता है। क्या यह राष्ट्रध्वज का अपमान है। क्या यह राष्ट्र का अपमान है। क्या यह देशद्रोह की श्रेणी में आता है। क्या यह क्षमा योग्य अपराध है। क्या इस तरह के घटनाक्रम के लिए कोई गाइड लाइन या नियम कानून हैं। या फिर कानून के निर्माता नेताओं ने खुद को बचाने के लिए ऐसे अवसर के लिए कुछ भी दर्ज नहीं किया।