
कलेक्टर के इस फैसले से जिले भर के साहूकारों में हड़कंप मच गया है। हालांकि गरीब आदिवासी एवं किसानों को जरूर दबंग और साहूकारों के कर्ज से मुक्ति मिली है। खास बात यह है कि कलेक्टर ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि अलीजरापुर जिले में कतिपय अधिकारियों ने पूर्व में साहूकारों को रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी किए थे। साथ ही उनका नवीनीकरण भी किया जाता रहा। कलेक्टर ने ऐसे सभी साहूकारी लाइसेंस को साहूकारी अधिनियम की धारा 11 ख के तहत शून्य कर दिया। मप्र साहूकार अधिनियम 2000 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी नहीं होता। इस नियम के तहत अनुसूचजि क्षेत्र में साहूकारी के लिए लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है। जबकि अलीराजपुर जिले की सोंडवा, कट्ठिवाड़ा, अलीराजपुर, जोबट और चंद्रशेखर आजाद नगर तहसील संविधान अनुच्छेद 214 के तहत अनुसूचित क्षेत्र की श्रेणी में आती हैं।
ज्यादा ब्याज वसूल रहे
कलेक्टर ने आदेश में स्पष्ट किया कि अनुसूचित क्षेत्र में साहूकार आदिवासी एवं गरीबों को अधिक दर पर ब्याज देकर वसूली कर रहे थे। कई लोगों ने कलेक्टर को बताया कि साहूकारों को पैसा लौटाने के बाद भी ब्याज का पैसा देना पड़ रहा है। जिसके एवज में साहूकारों ने जमीन, जेवरात गिरवीं रखे हैं। कलेक्टर ने शिकायत के आधार पर साहूकारों के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज कराया। साथ ही गिरवी जमीन, पशु, जेबर आदि वापस भी दिलाए हैं।
मेरे पास जनसुनवाई में लोग शिकायत लेकर आ रहे थे। जांच में पता चला कि साहूकार लोग लोगों की जमीन, संपत्ति गिरवी रखकर कर्जा देते हैं। ज्यादा ब्याज वसूलते हैं। लोग मूल का कई गुना पैसा लौटा चुके। फिर भी कर्जा नहीं चूकता। कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। गरीबों का गिरवी रखा सामान, जमीन भी वापस लौटाई है। साथ ही सभी साहूकारों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।
गणेश शंकर मिश्रा, कलेक्टर, अलीराजपुर