
सूत्र बता रहे हैं कि जब आरएसएस के पदाधिकारियों ने खुले तौर पर कहा कि मप्र में शिवराज विरोधी लहर चल रही है तो शिवराज सिंह ने काफी सारे ऐसे बदलाव कर डाले जो शिवराज विरोधी लहर को चुनाव से पहले ना केवल खत्म कर दें बल्कि एक बार फिर शिवराज के नाम की लहर चला दें। सरकारी खजाने से वित्त पोषित प्रचार ऐजेंसियां तो अपना काम कर ही रहीं हैं परंतु इसके अलावा भी काफी कुछ हो रहा है। 'शिवराज के सिपाही' के नाम पर आम जनता को सीधे शिवराज सिंह से जोड़ा जा रहा है। स्वभाविक है यह डायरेक्ट कनेक्शन वक्त आने पर भाजपा के लिए नुक्सानदायक भी हो सकता है।
पता चला है कि एक बहुत बड़ा समूह तैयार किया गया है जो सिर्फ शिवराज सिंह चौहान के लिए काम कर रहा है। भोपाल के एक वरिष्ठ नेता जिनकी आयु 50 से 60 के बीच है। जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं और वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर, रामेश्वर शर्मा, सुरेन्द्र नाथ सिंह एवं महापौर आलोक शर्मा के आसपास दिखाई दे जाते हैं। इस समूह में समन्वय का काम देख रहे हैं। उनकी अपनी कोई बड़ी राजनैतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। वो केवल भोपाल के एक वार्ड में एक्टिव दिखाई देते हैं।
कौन कौन हैं और क्या कर रहे हैं
इस समूह में कुछ ऐसे नेता जिनकी राजनैतिक महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा कुछ व्यापारी और प्रोफेशनल्स भी इसमें शामिल हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव बुद्धिजीवियों का एक बड़ा वर्ग भी इस समूह से जुड़ा हुआ है। यह समूह लगातार विस्तार पाता जा रहा है। ऐसे लोगों को जोड़ा जा रहा है जिनकी महत्वाकांक्षाएं ज्यादा नहीं हैं परंतु वो समाज में सक्रिय रहते हैं। ये लोग सिर्फ और सिर्फ शिवराज सिंह के लिए काम कर रहे हैं। आम जनता यदि भाजपा या नरेंद्र मोदी सरकार के विरुद्ध बात करे तो इन्हे कोई आपत्ति नहीं होती लेकिन यदि कोई शिवराज सिंह के खिलाफ बात करे तो ये समूह एक्टिव हो जाता है। ये लोग सोशल मीडिया पर मौजूद दूसरे भक्तगणों की तरह हमलावर नहीं होते बल्कि बड़ी ही चतुराई के साथ शिवराज सिंह की इमेज को बनाए रखने के लिए काम करते हैं। ये तथ्यों और तर्कों के आधार पर साबित कर देते हैं कि शिवराज ही सही है। भोपाल में मौजूद समन्वय की तरफ से इन्हे तथ्य एवं तर्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
तो इसमें खतरनाक क्या है
खतरनाक यह है कि मध्यप्रदेश में एक बड़ा वर्ग अब भाजपा और आरएसएस के अलावा शिवराज सिंह से सीधे जुड़ रहा है। यह ऐसा वर्ग है जो लाखों लोगों को एक साथ प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यदि भाजपा नेतृत्व ने शिवराज सिंह के प्रति कोई अप्रिय कार्रवाई की तो यह वर्ग उसे अन्यास मानेगा और भाजपा को नुक्सान पहुंचा सकता है। स्वभाविक है जब कोई नेता अपने संगठन से बड़ा होने लगता है तो वह संगठन के लिए खतरा बन जाता है। कहा जा रहा है कि आने वाले चुनाव में यही वर्ग शिवराज सिंह के लिए जमीन तैयार करेगा। यदि भाजपा के भीतर शिवराज विरोध के नाम पर कार्यकर्ताओं ने काम करने से इंकार किया तो शिवराज के सिपाही एवं यह समूह फ्रंट लाइन पर आ सकता है। सूत्र कहते हैं कि शिवराज सिंह एक सुलझे हुए नेता हैं परंतु राजनीति है, यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है।