
सिंधिया परिवार की संपत्ति के विवाद को लेकर दायर मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट में अधिवक्ता ने तर्क रखा कि मामले में पूर्व में नियुक्त कमीशन का निधन हो चुका है। इसलिए नए कमीशन की नियुक्ति की जाए। वहीं प्रकरण की अगली सुनवाई दीपावली त्यौहार को देखते हुए 20 दिसंबर के बाद की दी जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उक्त पुराने मामलों को हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत निर्धारित अवधि में निराकृत किया जाना है। साथ ही कोर्ट ने संपत्ति विवाद में समझौता करने के लिए पक्षकारों को एक अवसर दिया।
कोर्ट ने कहा- समझौता प्रस्ताव 6 अक्टूबर तक पेश करें
संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों के मध्य पूरे देश में कई केस लंबित हैं। इसमें मूलत: उत्तराधिकार को लेकर ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विवाद है। कोर्ट दोनों पक्षों से यह अपेक्षा करती है धारा 89 सीपीसी की पवित्र मंशा को ध्यान में रखते हुए यदि विवाद का अंतिम निराकरण सुनिश्चित करना चाहते हैं तो एक साथ सुलह समझौते के संबंध में 6 अक्टूबर तक प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में कहा कि सुलह समझौते के परिप्रेक्ष्य में धारा 89 की कॉपी न्यायालय से नि:शुल्क दिलाई जाए। ताकि वे अपने पक्षकार से संपर्क कर सार्थकता सुनिश्चित कर सकें। कोर्ट ने आदेश की प्रतिलिपि नि:शुल्क देने के आदेश दिए।
ज्योतिरादित्य ने 1990 में दायर किया था मामला
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 1990 में कोर्ट में उक्त मामला दायर करते हुए कहा कि सिंधिया राजवंश के युवराज होने के कारण सिंधिया राजवंश की संपत्ति पर उनका हक है। वहीं इसके खिलाफ उनकी बुआ यशोधरा राजे,वसुंधरा राजे आदि की ओर से कहा गया कि उत्तराधिकारी कानून के तहत उक्त संपत्ति में उनका भी हक है। इसलिए उनके हक की संपत्ति उन्हें दिलाई जाए।