
मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 2013 में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले प्रदेश में संविदा शाला शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी। भर्ती नियम तैयार करते-करते चुनाव भी हो गए। इसके बाद से सरकार कई बार नियम जारी कर चुकी है। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) 3 बार परीक्षा की संभावित तारीखें घोषित कर चुका है, लेकिन भर्ती नहीं हो रही।
इस बीच शिक्षकों के रिक्त पद 22 हजार से बढ़कर 41 हजार तक पहुंच गए। वित्त विभाग की आपत्ति के बाद कैबिनेट ने 9 हजार 560 पद कम कर दिए। फिर 31 हजार 645 पदों पर भर्ती की बात कही गई। अब शिक्षामंत्री 40 हजार पदों पर भर्ती की बात कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अतिथि शिक्षकों का मामला अटका होने के कारण संविदा शिक्षकों की भर्ती भी लटकी हुई थी। अब सरकार ने तय कर लिया है कि 25 प्रतिशत कोटा होगा। यदि बीएड/डीएड बेरोजगार इसका विरोध नहीं करते तो प्रक्रिया दिसम्बर में शुरू हो जाएगी।
प्राइवेट स्कूल टीचर भी मांग रहे हैं अनुभव के अंक
इधर प्राइवेट स्कूल टीचर भी अनुभव के अंक मांग रहे हैं। उनका कहना है कि वो भी बीएड/डीएड पास हैं। वो भी शिक्षा के अधिकार के तहत निर्धन बच्चों को पढ़ा रहे हैं और उनका वेतन भी अतिथि शिक्षकों के समान बहुत कम है। एडवोकेट शैलेन्द्र गुप्ता का कहना है कि जब दोनों वर्गों में सबकुछ समान हैं तो केवल इसलिए कि वो प्राइवेट स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं, उन्हे अनुभव के अंकों से वंचित नहीं किया जा सकता।