शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी अध्यापकों ने गुप्त काल के शिक्षक चाणक्य को याद करते हुए संकल्प लिया कि यदि म.प्र. सरकार अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन नहीं करती तो इस सरकार की शोषण की नीति को जनता के बीच जाकर उजागर करेंगे। शिक्षक दिवस पर दिल्ली में अध्यापकों का अर्धनग्न यह प्रदर्शन से एक बात साफ है कि ये अध्यापक इस बार सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। यदि शीघ्र ही मप्र की बीजेपी सरकार अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन नहीं करती तो अगामी 2018 के चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

3 दिन चले धरना प्रदर्शन के चलते दिल्ली से कई राजनेताओं ने मुख्य मंत्री शिवराज सिंह के ऊपर दबाव बनाया जिसके चलते मुख्यमंत्री ने सम्वीलयन के संकेत दिये। आज के इस रैली प्रदर्शन में मंडला जिले से जिलाध्यक्ष डी.के.सिंगौर, रविन्द्र चौरसिया, संजीव सोनी, सुनील नामदेव, प्रकाश सिंगौर, नंदकिशोर कटारे, के. के. चौहान, दिलीप मरावी, अजय मरावी, उमेश यादव, नरेश सैयाम, सुभाष साहू, गौरव अग्रवाल, अशोक अरसिया, मोहनलाल यादव, विवेक मिश्रा, सलिल तिवारी, महेंद्र झारिया, कमोद पावले, कुशल परस्ते, कमलेश मरावी, रघुवीर गोठरिया, जयदेव मार्को, वीर सिंह, संजय रजक, अनूप मरावी, जयकुमार, तोडर मरावी, गोविंद सिंगौर, एम. सी. कुंजाम, पी. आर. गौठरिया, सुकरत पूसाम, श्यामबिहारी चौधरी, हरिलाल वरकडे, संतोष बैरागी, नन्हेलाल मरावी, सुरेन्द्र कोकडिया, मनीराम मरावी, हल्केराम तेकाम, गोविंद सिंगोर, रविशंकर हरिनखेरे, इन्द्रभान मरावी, ओमकार परस्ते, विश्रामसिंह कुलस्ते, राजू उर्रेती, सूरज पन्द्राम, लालसिंह तेकाम, रामदयाल वरकडे, सुमरत मार्को, वीरेन्द्र सिंह उइके, प्रकाश मरावी, कमलेश मरावी, उदय उईके, अंग्रेज उईके, मनोज सवेॅटे, गोपाल मरावी, प्रेम मरावी, अनुपम पदम, हेम सिह, रामकुमार नरेॅते, राकेश बिल्टारिया, राम सिंह तिलगाम, कोपासिंह धुर्वे, नरेश पाण्डया आदि शामिल है.