
यहां पढ़ने वाले छात्र गांधी टोपी पहनकर आते हैं. छात्रों का कहना है की गांधी टोपी पहनकर आना उन्हें अच्छा लगता है और वे यह काम अपनी मर्जी और खुशी से करते हैं. छात्रों का कहना है कि उन्हें गांधी टोपी पहनने से गर्व महसूस होता है. साथ ही गांधीजी के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलती है. संभाग का सबसे पुराना यह स्कूल और भी कई विशेषताएं खुद में समेटे हुए है. स्कूल में 1892 से लेकर आज तक स्कूल में पढ़ने वाले सभी छात्रों का रिकॉर्ड सुरक्षित है.
स्कूल को बुनियादी नाम इसलिए दिया गया, क्योंकि यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ जीवन यापन के लिए प्रशिक्षित भी किया जाता था. उस समय छात्रों को चरखा चलाना सिखाया जाता था, जिससे कि वे आत्मनिर्भर बने. भले ही यह चरखा चलाने की बात पुरानी हो गई हो, लेकिन आज भी स्कूल में बच्चे चरखा चलाना सीखते हैं. स्कूल में 8वीं तक कक्षाएं संचालित होती हैं, जिसमें लगभग 250 छात्र पढ़ते हैं और सभी स्कूल में गांधी टोपी पहनकर आते हैं.