
क्या हो सकता है दिग्विजय सिंह का प्लान बी

अमृता राय सिंह तो राजनीति में ही नहीं हैं

सिंधिया और कमलनाथ के सामने अमृता राय सिंह कैसे
मध्यप्रदेश में इन दिनों चेहरे की लड़ाई चल रही है। दावेदारों में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रमुख हैं। दोनों कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं और कांग्रेस को दोनों की राष्ट्रीय स्तर पर जरूरत भी है परंतु मध्यप्रदेश जीतना भी जरूरी है। राहुल गांधी खुद कंफ्यूज हैं, कमलनाथ और सिंधिया में कौन उपयुक्त होगा। पिछले दिनों कमलनाथ ने सिंधिया को एनओसी दे दी लेकिन दिग्विजय सिंह ने धीरे से कहा कि 'कोई नया चेहरा' होना चाहिए। समझना होगा कि यह नया चेहरा कौन हो सकता है। कहीं अमृता राय सिंह तो नहीं।
रणनीति क्या हो सकती है

हो तो यह भी सकता है
6 माह के राजनीतिक अवकाश के कारण हाईकमान को दिग्विजय सिंह के महत्व के बारे में पता चल जाएगा। ट्वीटर पर उनके लिए साइबर हमलावर तैनात कर दिए गए थे जो बात बात पर उन्हे ट्रोल किया करते थे। अब वो भी अवकाश पर हैं। इस दौरान दिग्विजय सिंह का विरोध कम होता चला जाएगा और यदि विरोध कम हो गया तो दिग्विजय सिंह का ऊंचा कद फिर से स्पष्ट दिखाई देने लगेगा। दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी को संकटमोचक नेता को कांग्रेस हाईकमान चाहकर भी रिटायर नहीं कर सकता। यदि राहुल गांधी सिंधिया और कमलनाथ में से किसी एक का नाम फाइनल नहीं कर पाए तो धीरे से अमृता राय सिंह का नाम बढ़ा दिया जाएगा। नया नाम है, कोई विरोध नहीं। साथ में कार्यकर्ताओं का सैलाब। सारी बाजी ही पलट जाएगी।
अमृता राय सिंह में योग्यता क्या है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमृता राय सिंह में योग्यता क्या है। यहां याद रखना होगा कि अमृता राय जानी-मानी पत्रकार हैं। वे एनडीटीवी न्यूज चैनल में एंकर थीं, फिर उन्होंने जी न्यूज में सेवाएं दीं और बाद में वे राज्य सभा टीवी में बतौर सीनियर एंकर चली गईं। वो हिंदी न्यूज चैनल स्टार न्यूज (अब ABP न्यूज) की लॉन्चिंग टीम की अहम सदस्य रही हैं। कुछ समय तक CNEB चैनल में भी सेवाएं दे चुकीं हैं। टीवी पत्रकारों की फेहरिस्त में अमृता की गिनती अनुभवी और ज्ञानी पत्रकारों में होती है। उनकी साहित्य और समाज जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है।
खास बात यह है कि उन्हे सवाल उठाना आता है। विषय का अध्ययन करना आता है। एंकर रहीं हैं अत: अपनी बात रखना आता है और खुली बहस में शामिल होना भी आता है। सत्ता के आसपास रहीं हैं इसलिए सत्ता की समझ भी है। क्या सही है और किसे सही बनाया जा सकता है यह भी अमृता भलीभांति समझतीं हैं। वो नादान लड़की नहीं है। यदि शिवराज सिंह के सामने आ गईं तो भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल हो जाएगी। उनके पास शिवराज से करने के लिए सवालों का पुलिंदा होगा और शिवराज सिंह के पास कुछ नहीं। मध्यप्रदेश में जातिवाद या सम्प्रदाय के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होता। अत: यहां कोई लहर या आंधी भी नहीं चलाई जा सकती। हां शिवराज विरोधी लहर अवश्य चल रही है। सोशल मीडिया के जरिए माहौल कैसे बदलना है, दिग्विजय सिंह इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। साइबर हमलावर केवल दिग्विजय सिंह को टारगेट करते हैं, कुछ नए अकाउंट बन गए तो भाजपा के साइबर हमलावर भी कंफ्यूज हो जाएंगे।