
शल्य की वृत्ति खत्म करो
मोदी ने बताया कि शल्य कर्ण के सारथी थे। वो हतोत्साहित करने का काम ही करते थे। शल्य इंसान नहीं ये एक वृत्ति है, जो महाभारत ही नहीं, आज के युग में भी है। इन लोगों को पहचाने की जरूरत है। जब डाटा अनुकूल होता है तो इंस्टीट्यूट भी अच्छे लगते हैं। उनकी उम्मीदों के खिलाफ डाटा जाते ही संस्थान और वहां के लोग भी खराब लगने लगते हैं।
लोग ईमानदारी को कमजोर करना चाहते हैं
मोदी ने बोले कि आचार्य चाणक्य ने कहा है- जैसे पूरे वन में अगर एक ही वृक्ष में आग लग जाए तो पूरा वन जल जाता है। परिवार में कोई एक गड़बड़ हो जाए तो पूरे परिवार की मर्यादा धूल में मिट जाती है। ये बात संस्था और देश के लिए भी शत-प्रतिशत लागू होती है। देश में मुट्ठीभर लोग ऐसे हैं, जो प्रतिष्ठा और ईमानदार सामाजिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम करते हैं। इन लोगों को हटाने के लिए सरकार ने पहले ही दिन से स्वच्छता अभियान शुरू किया हुआ है।'
हमने वो रास्ता चुना है जो कठिन है
उन्होंने कहा कि चुनाव में रेवड़ी बांटने की बजाय, इस देश को मजबूत बनाने का कोई और रास्ता नहीं हो सकता है क्या? सत्ता और वोट की ही चिंता करेंगे? हमने अलग रास्ता चुना है, वो रास्ता चुना है, कठिन है, लेकिन हम लोगों को मजबूत कर रहे हैं। इसके लिए मेरी आलोचना भी हो रही है। अगर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से पैसे भेजता हूं तो जो भूतिया लोग फायदा उठाते थे, उनके नाम गायब हो गए हैं।