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स्पष्ट नहीं थे चार सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि सिविल सर्विसेज एग्जाम की प्रिलिम्स परीक्षा 18 जून को हुई थी और इस परीक्षा में 4 सवाल ऐसे थे जो स्पष्ट नहीं थे। ये सवाल ऐसे थे जिसके एक से ज्यादा उत्तर थे या फिर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं था। याचिकाकर्ता ने कहा है कि कई छात्र ऐसे हैं जो आखिरी बार परीक्षा में बैठेंगे। ऐसे में 4 अस्पष्ट सवालों के कारण वह अधिकार से वंचित रह जाएंगे। इस मामले में अक्टूबर में मुख्य परीक्षा होनी है और इसके लिए मेरिट लिस्ट तैयार की जा चुकी है।
छात्रों ने शीर्ष कोर्ट से लगाई गुहार
छात्रों ने शीर्ष कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि UPSC को निर्देश दिया जाना चाहिए कि 4 गलत सवालों के एवज में पूरे नंबर दिए जाएं और इसके बाद अगर कोई स्टूडेंट मेरिट लिस्ट में आता है तो उसे भी मेरिट लिस्ट में जोड़ा जाए। इससे उन्हें गलत सवालों के कारण मुख्य परीक्षा में बैठने से वंचित न किया जा सके। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही यूपीएससी प्रिलिम्स परीक्षा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस याचिका में कोई मेरिट नहीं दिखाई देती। इस बारे में आई याचिका में गलत सवाल के लिए अंक हटाने या सबको बराबर अंक देने की मांग की गई थी।