जयपुर। एक्टर श्रीवल्लभ व्यास का जयपुर में सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया। अपने दोस्त के अंतिम संस्कार में फिल्मी जगत की एक भी हस्ती नहीं पहुंची। बस कुछ करीबी लोगों के बीच ही व्यास का अंतिम संस्कार कर दिया गया। कलाकारों के प्रति संवेदनशीलता और एकता का प्रदर्शन करने वाले बॉलीवुड के किसी भी कलाकार ने एक अदद श्रृद्धांजलि का ट्वीट तक नहीं किया। बता दें कि श्रीवल्लभ ने आमिर खान की सुपरहिट फिल्म लगान में ईश्वर काका का किरदार निभाया था। । उनकी भूमिका को काफी सराहना भी मिली थी।
बता दें कि श्रीवल्लभ व्यास जैसलमेर के रहने वाले थे और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्रीज में अपना अलग ही मुकाम हासिल किया था। जैसलमेर में उनका पैतृक मकान सोनार दुर्ग में है और उनका बचपन इसी दुर्ग की गलियों में बीता था। करीब 9 साल से पैरालिसिस झेल रहे व्यास ने जयपुर में रविवार को अंतिम सांस ली। रविवार की शाम उनके परिजन जैसलमेर से जयपुर के लिए रवाना हो गए थे। उनके पीछे उनकी पत्नी शोभा व्यास, दो बेटियां शिवानी-रागिनी है। उनकी माता उनके छोटे भाई के साथ हैदराबाद में रहती है।
व्यास का जीवन संघर्ष भरा रहा
व्यास का जीवन संघर्ष भरा रहा। उनका जन्म 17 सितंबर 1958 को जैसलमेर में हुआ था। राजस्थान यूनिवर्सिटी से हिन्दी में एमए करने के बाद वे 1976 में मुम्बई चले गए थे। पहला सीरियल 1981 में किया। उसके बाद छोटे मोटे किरदार विज्ञापन सीरियल में किए। 1999-2000 में उन्हें प्रसिद्धि मिली। ऐसे में 24 साल संघर्ष के बाद वे फिल्म इंडस्ट्रीज में स्थापित हो पाए। 1981 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए सीरियल काठ की गाड़ी में श्रीवल्लभ व्यास ने अहम किरदार निभाया था। उसके बाद कई विज्ञापनों धारावाहिकों में उन्हें रोल मिला वे 1973 में जैसलमेर से जयपुर पढ़ाई करने के लिए गए थे। उन्होंने 1976 में एमए हिन्दी में किया और बाद में सीधे ही मुम्बई की तरफ रुख कर लिया। जहां नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में 700 रुपए में नौकरी भी की।