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सीएम योगी के भाषण के इसी वाक्य पर विपक्षी पार्टियों के साथ ही अल्पसंख्यकों को ऐतराज हो सकता है। इतना ही नहीं सीएम योगी ने दोनों ही सभाओं में होली के त्योहार और जुमे की नमाज की आपस में तुलना भी की और दोनों ही जगहों पर साफतौर पर कहा कि होली का महत्व इसलिए काफी ज़्यादा है क्योंकि वह साल में एक बार पड़ती है, लेकिन जुमे का दिन तो साल में 52 बार आता है।
उन्होंने इस बात का श्रेय लेने की भी कोशिश की कि उनके दबाव की वजह से ही इस बार होली का रंग खेलने का वक्त कम नहीं किया गया, बल्कि पहली बार होली की वजह से जुमे की नमाज को दो घंटे के लिए आगे बढ़ाना पड़ा। अपनी सभाओं में सीएम योगी ने बार-बार दोहराया कि उन्होंने अफसरों को पहले ही सख्त हिदायत दे दी थी कि जुमे की नमाज के चलते इस बार होली पर रंग खेलने का वक्त कम नहीं किया जाएगा।
सीएम योगी के इस बयान को पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी द्वारा श्मशान-कब्रिस्तान और रमजान-दिवाली पर बिजली की सप्लाई पर दिए गए विवादित बयान की कड़ी के तौर पर जोड़ा जा रहा है। गौरतलब है कि सीएम योगी ने रविवार को इलाहाबाद की फूलपुर लोकसभा सीट पर हो रहे चुनाव में पार्टी उम्मीदवार कौशलेन्द्र पटेल के समर्थन में दो चुनावी सभाओं को संबोधित किया। उनकी पहली सभा फाफामऊ विधानसभा क्षेत्र के नवाबगंज कस्बे में हुई, जबकि दूसरी सभा सिटी वेस्ट इलाके के प्रीतम नगर मोहल्ले में हुई। सीएम योगी ने दोनों ही सभाओं में होली और जुमे की नमाज की तुलना की और वाहवाही लूटकर लोगों को लुभाने की कोशिश की।