
बता दें कि 8 नवम्बर 2016 की रात पीएम नरेंद्र मोदी ने 500 एवं 1000 के नोटों को प्रचलन से बाहर घोषित कर दिया था। यह नोट बैंकों ने वापस लिए और बदले में 2000 के नोट दिए। एक सरकारी आंकड़े के अनुसार 6.7 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 2000 रुपए के गुलाबी नोट बाजार में उतारे गए। ठीक 526 दिन बाद ये सारे नोट बाजार से गायब हो गए। देश में कैश को लेकर फिर से हाहाकार मचा है। एटीएम, बैंक हर जगह लोग कैश के लिए दर-दर भटक रहे हैं। एटीएम खाली है और उसकी वजह से लोगों की जेब भी लेकिन इन 526 दिनों में ऐसा क्या हो गया कि 2000 का गुलाबी नोट आया और फिर इसकी इतनी किल्लत शुरू हो गई।
ब्लैकमनी के खिलाफ जारी हुआ गुलाबी नोट भी कालाधन हो गया
सरकार ने अर्थव्यवस्था में मजबूती का तर्क देते हुए ये नोट जारी किए थे लेकिन बड़ी मात्रा में जो नोट बाज़ार में जारी किए गए थे, वो वापस बैंक तक नहीं पहुंचे लगातार इन नोटों की जमाखोरी की खबरें आती रहीं। यही कारण रहा कि पिछले साल 2017 के मध्य से ही सरकार ने 2000 के नोटों की छपाई बंद कर दी थी। आंकड़ों के मुताबिक इस समय मार्केट में 6.7 लाख करोड़ मूल्य के 2000 के नोट सर्कुलेशन में हैं। यह सर्कुलेशन में जारी कुल 18.04 लाख करोड़ मूल्य के नोटों का एक तिहाई हिस्सा है।
पब्लिक ने अचानक 4 गुना नगदी निकाल ली
कैश की कमी की शिकायत के बाद सरकार पूरी तरह से हरकत में आई है। सरकार की तरफ से कोशिश की जा रही है कि 100, 200 और 500 रुपए के नोट को ज्यादा से ज्यादा छापा जाए।
सरकार की मानें तो पहले करीब 500 करोड़ रुपए कीमत के 500 के नोट छापे जा रहे थे, लेकिन अब कोशिश है कि 2500 करोड़ रुपए तक की छपाई की जाएगी। सरकार ने इस तंगी के पीछे तर्क दिया है कि आमतौर पर एक महीने में 20,000 करोड़ रुपये कैश की मांग होती है, लेकिन अप्रैल के पहले 13 दिनों में ही 45,000 करोड़ रुपये निकाले गए।
8 फीसदी एटीएम खाली, इन राज्यों में बढ़ा संकट
जानकारी के मुताबिक इस समय देश भर में सारे एटीएम में से आठ फीसदी एटीएम में कैश नहीं है। इस समय देश में कुल एटीएम के 25 फीसदी एटीएम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास हैं और उसके भी 16 फीसदी एटीएम में पैसा नहीं है। सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, गुजरात के बैंकों और एटीएम में कैश की दिक्कत सामने आ रही है और अब कहा जा रहा है कि दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और गुड़गांव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।