
12 मार्च को पंकज के घर पानसेमल में शादी थी। यहां दोनों कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। जब इसकी जानकारी सरला के पिता देवीदास को लगी तो वह पानसेमल पहुंच गया। यहां उसने बेटी को उसकी मां की तबीयत खराब होने और इलाज के लिए मुंबई ले जाने की जानकारी दी। मां की बीमारी का पता चलते ही बेटी भावुक हो गई और पिता के छल को नहीं समझ पाई।
गुरुवार सुबह वह पति के साथ मां से मिलने खेतिया जा पहुंची। घर में दाखिल होते ही मां ने बेटी पर मोगरी से हमाल कर दिया। पिता ने भी धारदार हथियार से उसके सिर पर तीन वार किए। लहूलुहान सरला जमीन पर गिर गई और तड़पने लगी। पंकज जब पत्नी सरला को बचाने दौड़ा तो परिजनों ने उस पर भी हमला कर दिया। जैसे-तैसे पंकज दरवाजा खोलकर बाहर भागा और थाने पहुंचा। मौेेके पर पहुंची पुलिस ने सरला को अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पंकज की रिपोर्ट पर पुलिस ने तीनों आरोपियों भाई हीरालाल, मां तुलसाबाई व पिता देवीदास के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर हिरासत में लिया। पुलिस ने शव का पीएम करवाकर शव पति पंकज को सौंप दिया है।
बेटी ने इज्जत डुबो दी, क्या करते मार दिया
बेटी को बेरहमी से मारने वाले माता-पिता और भाई से जब हत्या की वजह पूछी गई तो उनका कहना था कि हम बेटी को घर की इज्जत मानते हैं। उसने लव मैरिज कर गांव-समाज में हमें अपमानित किया। बेटी के इस कदम ने हमारी इज्जत तार-तार कर दी। जब हमारी इज्जत ही नहीं बची तो फिर आगे क्या सोचना। बेटी ने इज्जत डुबो दी क्या करते, इसलिए मार दिया। हमें इसका कोई पछतावा नहीं है।