
दरअसल, आजीविका और कौशल विकास दिवस पर आयोजित स्व-सहायता समूह के सम्मेलन में जब राज्यमंत्री विश्वास सारंग ने नशे का मुद्दा छेड़ा तो महिलाओं ने एक सुर में सरकार से शराबबंदी की मांग कर डाली। हालांकि इस पर मंत्री सारंग भड़क गए और उन्होंने महिलाओं को खुद अपने घर से शराबबंदी की सलाह दी।
गौरतलब है कि शराब से मिलने वाला राजस्व शिवराज सिंह सरकार की आय के मुख्य स्त्रोतों में से एक है। गुजरात, बिहार में शराबबंदी के बाद मध्य प्रदेश में शराब बंदी की मांग काफी दिनों से विभिन्न सामाजिक संगठन उठाते रहे हैं। खुद शिवराज सिंह चौहान जब से सीएम बने हैं शराबबंदी की बात करते आ रहे हैं लेकिन अब तक शराबबंदी तो दूर शराब की बिक्री तक कम नहीं की गई है।