
मंत्री ने कहा कि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में लगे संस्थानों को जैव ईंधन जैसे विषयों को भी उठाना चाहिए ताकि तेल आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि धान के ठंडलों या भूसे को पंजाब तथा हरियाणा में जलाया जाता है जिससे दिल्ली में प्रदूषण हो जाता है। उन्होंने कहा कि धान के एक टन भूसे (पराली) से 280 लीटर एथनाल निकाला जा सकता है।
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गडकरी ने कहा,‘ हम हर साल 40000 करोड़ रुपये मूल्य की लकड़ी, 4000 करोड़ रुपये मूल्य की कच्ची अगरबत्तियां, 35000 करोड़ रुपये मूल्य कागज की लुगदी व 35000 करोड़ रुपये मूल्य का अखबारी कागज आयात करते हैं। इस तरह से लकड़ी से जुड़ा कुल आयात एक लाख करोड़ रुपये का रहता है।’ मंत्री ने कहा कि सरकार ने बांस को पेड़ की श्रेणी से हटाया है और वह इसकी खेती को प्रोत्साहित कर रही है ताकि उक्त आयात में कमी लाई जा सके।