भोपाल। इंसान के पास दिमाग होता है, वो हालातों को समझ सकता है परंतु शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की किस्मत अब एक मोबाइल एप के हवाले कर दी गई है। मैदानी हालात से बेखबर अधिकारियों का कहना है कि प्राचार्य बाकी सभी कर्मचारियों की अटेंडेंस भी लगा सकता है परंतु सवाल यह है कि जब पूरा स्कूल ही पानी में डूब जाए तब क्या करें। कम्प्यूटर तो लकीर का फकीर होता है, उसे कैसे समझाएं कि स्कूल के रास्ते में पुलिया डूब गई, जा नहीं सकते। सड़क पर पानी भरा है। गांव वालों ने चक्काजाम कर दिया। ठेकेदार भ्रष्ट था पुल टूट गया। रास्ता 3 दिन के लिए बंद है। ना शिक्षक स्कूल पहुंच पा रहे हैं और ना ही प्राचार्य के पंख लगे हैं।
मप्र के मुखिया शिवराज के गृह नगर विदिशा में कलेक्टर कार्यालय के सामने बना सरकारी स्कूल पानी में डूब गया।
शा नवीन उमा विद्यालय बागसेवानिया कटरा हिल्स गोविन्दपुरा, भोपाल मे पानी भर गया है। स्कूल तक आना जाना भी मुश्किल हो गया है।
रायसेन, बेगमगंज, ग्राम महुआखेड़ा कला के पास सहका नाले में पानी रपटे के ऊपर आम लोगों सहित स्कूली बच्चे फंसे कई घण्टो से लगा जाम। ऐसे कैसे स्कूल चलें हम।
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