भोपाल। मैनिट (MANIT) के इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्यूनिकेशन डिपार्टमेंट (Electronics and Communications Dept.) के प्रोफेसर डॉ. आरके बघेल (Dr. RK Baghel) को नकली जाति प्रमाण (Fake caste certificate) बनाकर विभिन्न लाभ (PROFIT) लेने के मामले में दोषी पाया है।
इसके कारण मैनिट प्रशासन (Manit administration) ने इनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनके जाति प्रमाणपत्र को लेकर 2007 से विवाद है। कास्ट स्क्रूटनी कमेटी (Cast Scrutiny Committee) ने पाया कि डॉ. बघेल ( Dr. Baghel) जिस जाति वर्ग में होने का दावा कर रहे हैं वे उस वर्ग के नहीं है। हालांकि, बघेल का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट पर 14 अक्टूबर 2018 से कोर्ट ने स्टे दे रखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार कोई जाली प्रमाणपत्र नहीं बनवाया था। इस प्रकरण को डायरेक्टर प्रो. नरेंद्र सिंह रघुवंशी (Director Prof. Narendra Singh Raghuvanshi) के खिलाफ हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्योंकि, रघुवंशी के खिलाफ कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट की फैकल्टी डॉ. वासुदेव देहलवार ने अजाक थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। डॉ. बघेल और डॉ. देहलवार को अच्छा दोस्त बताया जाता है।
इसके कारण मैनिट प्रशासन (Manit administration) ने इनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनके जाति प्रमाणपत्र को लेकर 2007 से विवाद है। कास्ट स्क्रूटनी कमेटी (Cast Scrutiny Committee) ने पाया कि डॉ. बघेल ( Dr. Baghel) जिस जाति वर्ग में होने का दावा कर रहे हैं वे उस वर्ग के नहीं है। हालांकि, बघेल का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट पर 14 अक्टूबर 2018 से कोर्ट ने स्टे दे रखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार कोई जाली प्रमाणपत्र नहीं बनवाया था। इस प्रकरण को डायरेक्टर प्रो. नरेंद्र सिंह रघुवंशी (Director Prof. Narendra Singh Raghuvanshi) के खिलाफ हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्योंकि, रघुवंशी के खिलाफ कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट की फैकल्टी डॉ. वासुदेव देहलवार ने अजाक थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। डॉ. बघेल और डॉ. देहलवार को अच्छा दोस्त बताया जाता है।