उदयगढ़ अलीराजपुर से- राजेश जयंत। उदयगढ़ खंड शिक्षा विभाग का संविदा शिक्षक भर्ती घोटाला पहले से ही कोर्ट में चल रहा है वहीं शनिवार को उदयगढ़ पुलिस ने इसी विभाग के दूसरे बड़े मामले में 50000 पेज की चार्जशीट जोबट न्यायालय में प्रस्तुत की है।
सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग अलीराजपुर की शिकायत पर 16 जुलाई 2020 को तत्कालीन लेखापाल ऋतुराज रविंद्र सिंह सोलंकी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 9720 धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी, 201 भादवी का अपराध पंजीबद्ध कर पुलिस ने विवेचना में लिया था। जब प्रकरण पंजीबद्ध करवाया था उस वक्त तत्कालीन लेखापाल ऋतुराज रविंद्र सिंह सोलंकी द्वारा एक करोड़ 22 लाख 85 हजार 139 रुपए का गबन और तीन करोड़ 81लाख 49 हजार रुपए की अनियमितता की जाना उल्लेखित थी।
पुलिस अधीक्षक विपुल श्रीवास्तव,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिट्टू सहगल, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी दिलीपसिंह बिलवाल के मार्गदर्शन में निरीक्षक पी एस डामोर द्वारा इस मामले की विवेचना की गई । पुलिस की पड़ताल में 5 करोड़ के गबन का मामला बढ़ कर 16 करोड़ तक पहुंच गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ऋतुराज सोलंकी ने शासकीय खाते पर नेट बैंकिंग जारी करवाई। नेट बैंकिंग तथा चेकों के माध्यम से स्वयं के खाता क्रमांक 3149 227810 15 एसबीआई जोबट व 119401 00004853 बीओबी उदयगढ़ मे शासकीय राशि जमा कर आहरित की। इसके अतिरिक्त विभाग के कर्मचारियों व कतिपय अनाधिकृत व्यक्तियों के खातों मे भी राशि का लेनदेन किया। इस तरह ऋतुराज सोलंकी के विरुद्ध ₹5.8144052 का आहरण एवं गबन के साक्ष्य पाए गए।
2011 से 2017 तक पदस्थ रहे 07 खंड शिक्षा अधिकारी बनाए गए आरोपी
16 करोड रुपए की शासकीय राशि गबन मे पुलिस ने तत्कालीन लेखापाल ऋतुराज सोलंकी को प्रमुख आरोपी बनाते हुए वर्ष 2011 से वर्ष 2017 तक यहां पदस्थ रहे 07 खंड शिक्षा अधिकारी, 02 लेखापाल, सहायक ग्रेड 2, मंडल संयोजक व केंद्राध्यक्ष पद पर रहे कर्मचारी सहित उप कोषालय जोबट के प्रभारी अधिकारी को मामले आरोपी बनाया है।
सात खंड शिक्षा अधिकारी और अन्य कर्मचारी भी आरोपी
वर्ष 2011 से वर्ष 2017 तक यहां कुल 8 खंड शिक्षा अधिकारी पदस्थ रहे जिन्होंने अपनी पदस्थापना के दौरान बड़ी राशि का गबन किया। एक का निधन हो चुका है जबकि 7 को आरोपी बनाया गया है।
रणसिंह डावर का निधन हो चुका है जिनके विरुद्ध 47.13165 रुपए गबन किए जाने के दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। थाना प्रभारी पी एस डामोर ने बताया कि पुलिस की तफ्तीश में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी डूंगरसिंह सोलंकी द्वारा 1.0599520, भोला प्रसाद पटेल द्वारा 2.5140510, नवलसिंह रावत द्वारा 5926564, परमानंद धाकड़ द्वारा 4048786, माधुलाल परमार द्वारा 3679 627, रामकिशोर तोमर द्वारा 3349000, नवीन श्रीवास्तव द्वारा 2328 239 एवं डॉ सूरज सिंह के द्वारा 23676809 रुपए का गबन करना पाया गया है।
इन्हें भी बनाया गया आरोपी
वर्ष 2011 से वर्ष 2017 के मध्य यहां पदस्थ रहे लेखापाल, सहायक ग्रेड 2 और केंद्राध्यक्ष के विरुद्ध भी गबन के साक्ष्य पाए जाने पर उन्हें आरोपी बनाया गया है।
लेखापाल पद पर पदस्थ रहे खुमानसिंह भूरा के द्वारा 2611286, बीएल राव द्वारा 1199144 रुपए का गबन एवं 212927 का रिकॉर्ड संधारण नहीं करना पाया गया है।
अनिवार्य सेवानिवृत्ति ले चुके केंद्राध्यक्ष हेतराम राजपूत द्वारा 11614453 रुपए एवं तत्कालीन सहायक ग्रेड दो स्थापना शाखा प्रभारी रहे मुकेश नीमा द्वारा 511816 रुपए अनाधिकृत तरीके से आहरण कर गबन करना पाया गया।
उप कोषालय अधिकारी की भी बड़ी भूमिका-बनाया आरोपी
गबन के इस बड़े मामले में उप कोषालय जोबट के प्रभारी अधिकारी नरसिंह भूरिया की बड़ी भूमिका सामने आई है। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उन्हें भी आरोपी बनाया है । भूरिया ने अपने पद का दुरुपयोग किया। खंड शिक्षा अधिकारियों से मिलकर वेंडरों के माध्यम से अवैध रूप से संचालित खातों में भुगतान किया।
संपत्ति राजसात के लिए लिखा कलेक्टर को पत्र
मामले के मुख्य आरोपी ऋतुराज सोलंकी द्वारा गबन की गई राशि से जो संपत्ति खरीदी गई है उसे राजसात करने के लिए थाना प्रभारी ने कलेक्टर को पत्र लिखा है। निरीक्षक पीएस डामोर ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि ऋतुराज ने अपनी पत्नी उषा सोलंकी के नाम से बड़ौदा गुजरात में 65 लॉक रुपए का एक मकान खरीदा है। स्वयं के नाम से मंडलेश्वर में 8 बीघा कृषि भूमि, साले विजय बहादुर हाड़ा के नाम से जोबट में एक प्लाट तथा जोबट में ही झाबुआ रोड पर मंगल श्री ग्रेनाइट भवन निर्माण में ₹4500000 लगाना पाया गया है।
थाना प्रभारी ने बताया कि 173 (8) के अंतर्गत जांच पड़ताल जारी है । इस दौरान अन्य किसी के विरुद्ध साक्ष्य पाए जाने पर उन्हें आरोपी बनाया जाएगा।
दस्तावेज नहीं मिले उदयगढ़ और अलीराजपुर में
थाना प्रभारी पी एस डामोर ने बताया कि मामले की छानबीन के लिए विकासखंड उदयगढ़ एवं जनजातीय कार्य विभाग अलीराजपुर में अनेक बार पत्र लिखे किंतु वहां से दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। आरोपपत्र तैयार करने के लिए उन्हें संभागीय कार्यालय इंदौर, भोपाल और एजीएमपी ग्वालियर जाकर दस्तावेज एकत्रित करना पड़े हैं अब उनका सत्यापन यहां के दस्तावेजों से किया जाना है।