नई दिल्ली। जब-जब पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं, सरकार की तरफ से हमेशा बयान दिया जाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पेट्रोल के दाम पर पड़ता है लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम $70 प्रति बैरल से कम हो चुके हैं। बावजूद इसके भारत में पेट्रोल के दाम ₹100 प्रति लीटर के आसपास बने हुए हैं। जबकि सभी टैक्स मिलाकर ₹75 प्रति लीटर से अधिक नहीं होने चाहिए।
पेट्रोल के दाम पर सरकार का कंट्रोल है, यह रहा सबूत
भारत में कहने को तो सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल का दाम (Petrol Diesel Price) तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन, उनके कामकाज में ऐसा दिखता नहीं है। क्योंंकि, जब-जब चुनाव का मौसम (Election Season) आता है, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम घरेलू बाजार में स्थिर रहते हैं। चुनाव खत्म होते ही फिर कीमत बढ़ने लगती है। बीते अक्टूबर-नवंबर के दौरान जब बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) हो रहा था, तब लगातार 48 दिनों तक दाम में कोई फेरबदल नहीं हुआ था। उसके बाद लगभग रोज कीमतें बढ़ीं। इस समय पश्चिम बंगाल (West Bengal Assembly Election), केरल और असम समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार कम हो रहे हैं क्रूड ऑयल के दाम
सऊदी अरब के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कल जो ड्रोन और मिसाइल से हमला हुआ, उसका असर दिखा। कल ही अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले सोमवार को ही सुबह ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 70 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था। मंगलवार को सिंगापुर में WTI Crude 0.26 डॉलर घट कर 64.79 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड हो रहा था। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) भी 1.12 डॉलर प्रति बैरल घट कर 68.24 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।