दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 216 में हमने आपको बताया था कि न्यायालय कुछ शर्तों के अनुसार चार्जशीट में दर्ज धाराओं में परिवर्तन या परिवर्धित (जोड़ना) कर सकता है। ऐसे परिवर्तन के होने के बाद क्या न्यायालय पूर्व के साक्षियों को दोबारा बुलवाएगा या नई धाराओं के अपराध के साथ नए साक्षियों को भी बुलवा सकता है, जानते हैं इनका जबाब आज के लेख में।
दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 217 की परिभाषा:-
• जब न्यायालय द्वारा आरोपी की किसी भी अपराध की धाराओ में बदलाव या जुड़ाव अर्थात परिवर्तन किया जाता है तब आरोपी के साक्षियो एवं पीड़ित व्यक्ति के साक्षियो को न्यायालय पुनः समन द्वारा गवाही के लिए बुलावा सकता है एवं पुनः परीक्षा करवा सकता है।
• न्यायालय को अगर लगता है कि पुराने साक्षियो के अतिरिक्त नए साक्षियो को गवाही के लिए बुलवाना आवश्यक है तो वह किसी भी अन्य नए साक्षियो की भी न्यायालय में बुलवा कर बयान या कथन ले सकता है।
अर्थात न्यायालय द्वारा आरोपो की धाराओ में परिवर्तन होने के बाद साक्षियो की गवाही में भी बदलाव हो सकता है।एवं पुनः नए बयान,कथन दर्ज किए जा सकते हैं। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com