यदि आप राजस्थान में पर्यटन के लिए जाएंगे तो आपके अभिवादन के समय खम्मा घणी शब्द का उपयोग किया जाएगा। कुछ लोगों का मानना है कि खम्मा घणी का अर्थ होता है ' आपका स्वागत है' तो कुछ लोग मानते हैं कि खम्मा घणी यानी 'नमस्ते'। कुछ पर्यटकों को यह भी समझाया जाता है कि जब आम जनता अपने राजा का अभिवादन करती है तब खम्मा घणी शब्द का उपयोग किया जाता है। कुछ लोगों को लगता है कि जैसे उर्दू में अस्सलाम वालेकुम और वालेकुम अस्सलाम बोला जाता है ठीक उसी प्रकार राजस्थानी में खम्मा घणी और घणी खम्मा बोला जाता है। आइए जानते हैं कि उपरोक्त तीनों में से खम्मा घणी का सही अर्थ क्या है और क्या सचमुच तीनों में से कोई एक विकल्प सही है।
खम्मा घणी शब्द का अर्थ है बार-बार क्षमा याचना करना
खम्मा घणी दो शब्दों से मिलकर बना है, खम्मा और घणी, यह क्षेत्रीय भाषा के शब्द है। खम्मा का अर्थ होता है 'क्षमा' और घणी का अर्थ होता है 'बहुत ज्यादा'। इस शब्द का उपयोग कभी भी किसी भी प्रकार के अभिवादन के लिए नहीं किया गया। राजस्थान के राजा रजवाड़े जब अपनी कुलदेवी की पूजा करते हैं तब खम्मा घणी शब्द का उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ होता है कि यदि हमसे कोई भूल हुई है तो कृपया क्षमा करें। इस प्रकार खम्मा घणी शब्द का अर्थ हुआ बार-बार क्षमा याचना करना।
खम्मा घणी शब्द का अर्थ है अभयदान मांगना
कालांतर में राजा की सेवक खम्मा घणी शब्द का उपयोग करने लगे। इसका तात्पर्य था, अपनी बात रखने से पहले राजा से क्षमादान मांग लेना। मुगलों का इतिहास हमने ज्यादा पढ़ा है। मुगल बादशाहों के सामने भी उनके सेवक इसी प्रकार से बात रखते थे ' यदि जान की सलामती हो तो अपनी बात कहूं...'। मुगलों से पूर्व भारतीय संस्कृति में राजाओं के सामने अपनी बात रखने से पहले अभयदान मांगने की परंपरा रही है।
खम्मा घणी शब्द का अर्थ है विशेष प्रकार का सम्मान देना
अभय दान, जान की सलामती या फिर खम्मा घणी करते समय मांगने वाला व्यक्ति राजा के सामने नतमस्तक होता था। देखने वालों ने समझा कि इस प्रकार नतमस्तक होकर खम्मा घणी बोलना, राजा को विशेष प्रकार का सम्मान देते हुए उसका अभिवादन करना है। लोगों ने ऐसा करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे खम्मा घणी का पूरा अर्थ ही बदल गया। अब माना जाता है कि, कमर तक झुककर खम्मा घणी बोलने का मतलब है विशेष प्रकार का सम्मान देना।
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